एनसीएल ग्राउंड बिलौंजी में लग रहे मेले में 40 से 50 फीट ऊंचाई पर बिना सेफ्टी उपकरणों के काम करते दिखे बच्चे, जिम्मेदार विभागों की चुप्पी पर सवाल

सिंगरौली। जिले के बैढ़न मुख्यालय क्षेत्र स्थित एनसीएल ग्राउंड बिलौंजी में इन दिनों लग रहा मेला चर्चा और विवादों का विषय बनता जा रहा है। मेले के संचालन को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि मेला संचालक द्वारा सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है और मेले में नाबालिग बच्चों से भी कार्य कराया जा रहा है। इस पूरे मामले ने न केवल श्रम कानूनों बल्कि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।जानकारी के अनुसार मेले में लगाए जा रहे बड़े झूलों और अन्य संरचनाओं पर कई नाबालिग बच्चे कार्य करते देखे गए। बताया जा रहा है कि ये बच्चे लगभग 40 से 50 फीट की ऊंचाई पर चढ़कर काम कर रहे थे, जबकि उनके पास कोई सुरक्षा बेल्ट, हेलमेट या अन्य आवश्यक सुरक्षा उपकरण मौजूद नहीं थे।

दुर्घटना हुई तो जिम्मेदार कौन होगा?

सिंगरौली जिला पहले से ही विभिन्न दुर्घटनाओं और औद्योगिक गतिविधियों के कारण संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में यदि किसी मेले में सुरक्षा नियमों की अनदेखी कर ऊंचाई पर कार्य कराया जा रहा है, तो किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।ऐसे में यदि कार्य के दौरान किसी नाबालिग बच्चे के साथ दुर्घटना हो जाती है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? मेला संचालक, श्रम विभाग, स्थानीय प्रशासन या फिर अनुमति देने वाले विभाग? यह सवाल अभी से लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

श्रम विभाग की भूमिका पर भी सवाल

जिले में श्रम विभाग और बाल श्रम उन्मूलन से जुड़े कई विभाग सक्रिय होने का दावा करते हैं, लेकिन इसके बावजूद विभिन्न स्थानों पर नाबालिग बच्चों से कार्य कराए जाने की शिकायतें लगातार सामने आती रहती हैं। यदि वास्तव में नाबालिग बच्चों से कार्य कराया जा रहा है तो संबंधित विभागों को तत्काल जांच कर कार्रवाई करनी चाहिए। सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर जिम्मेदार अधिकारियों की नजर इन गतिविधियों पर क्यों नहीं पड़ रही है।

एनसीएल की भूमि पर मेला, आवंटन प्रक्रिया भी चर्चा में

सूत्रों के अनुसार जिस ग्राउंड में मेला लगाया जा रहा है वह एनसीएल के स्वामित्व वाली भूमि बताई जाती है। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि मेले के लिए ग्राउंड का आवंटन किस प्रक्रिया के तहत किया गया और किन शर्तों पर अनुमति प्रदान की गई।वैसे तो सामान्य व्यक्तियों या सामाजिक संगठनों को कई बार ऐसे मैदानों के उपयोग के लिए अनुमति प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, जबकि बड़े आयोजनों को आसानी से अनुमति मिल जाती है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

प्रवेश शुल्क और कर वसूली को लेकर भी चर्चा

मेले में आने वाले लोगों से प्रवेश शुल्क लिए जाने की भी चर्चा होती रही है। लोगों का आरोप है कि प्रवेश शुल्क के रूप में राशि वसूली जाती है, लेकिन इस संबंध में नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं, इसकी जांच आवश्यक है। यदि किसी प्रकार का कर या शुल्क लागू होता है तो संबंधित विभागों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नियमों के अनुसार उसका पालन हो और आवश्यक राजस्व शासन को प्राप्त हो।

 

जांच और कार्रवाई की मांग

पूरे मामले को लेकर जिला प्रशासन, श्रम विभाग, नगर निगम, पुलिस प्रशासन और एनसीएल प्रबंधन से जांच कराने की मांग है। यदि मेले में नाबालिग बच्चों से कार्य कराया जा रहा है या सुरक्षा मानकों का उल्लंघन हो रहा है तो जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग इस मामले को गंभीरता से लेते हैं या नहीं। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन मेले में सुरक्षा व्यवस्था, श्रम कानूनों के पालन और अनुमति संबंधी दस्तावेजों की जांच कर वास्तविक स्थिति को सार्वजनिक करता है या नहीं।

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