पलामू टाइगर रिजर्व में बीड़ी पत्तों की अवैध तुड़ाई, वन विभाग की निष्क्रियता पर सवाल

पलामू टाइगर रिजर्व वन क्षेत्र से कथित रूप से अवैध रूप से तोड़े गए बीड़ी (केंदू) पत्तों को सरकारी निगम के बोरों में भरकर विभिन्न स्थानों पर किए गए भंडारण और परिवहन करना शुरु हो गया है। इस पूरे मामले में वन विभाग की चुप्पी और निष्क्रियता को लेकर ग्रामीणों के बीच कई तरह के सवाल उठ रहे हैं।

खबर के अनुसार, पीटीआर वन क्षेत्र के जंगलों से बड़े पैमाने पर बीड़ी पत्तों की तुड़ाई की गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन पत्तों को वैध स्वरूप देने की कोशिश की जा रही है तथा इसमें विभागीय स्तर पर मिलीभगत की आशंका से भी इन्कार नहीं किया जा सकता।

ग्रामीणों का कहना है कि संरक्षित वन क्षेत्र से निकाले गए बीड़ी पत्तों का परिवहन किस मार्ग से किया जा रहा है और इसकी निगरानी कौन कर रहा है, यह अब भी स्पष्ट नहीं हो पाया है। ग्रामीणों के अनुसार लात, हरहे, चुंगरू, नवाडीह, चकलवा, मोरवाईकला, सैदूप, ततहा, मंडल, होरिलोंग, पुटवागढ़ खाड़, छेंचा, चपरी, बभंडीह सहित आसपास के कई गांवों में बड़े पैमाने पर बीड़ी पत्तों की तुड़ाई हो चुकी है।

आरोप है कि संग्रहित पत्तों के बंडलों को गांवों के नाबालिग बच्चों से उलट-पलट कराकर सरकारी बोरों में भरवाया जा रहा है। यदि यह आरोप सही है तो यह मामला केवल वन संरक्षण तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि बाल श्रम जैसे गंभीर सामाजिक और कानूनी प्रश्न भी खड़े करता है।

बीड़ी पत्ता तोड़ने वाले मजदूरों का कहना है कि क्षेत्र में रोजगार के अन्य साधन नहीं होने के कारण वे कम मजदूरी पर यह कार्य करने को मजबूर हैं। मजदूरों ने आरोप लगाया कि ठेकेदारों द्वारा समय पर भुगतान भी नहीं किया जाता है।

कई मजदूरों ने बताया कि उनकी मजदूरी अब तक बकाया है, जिससे उनके समक्ष आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। ग्रामीणों ने वन विभाग एवं जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।

उनका कहना है कि यदि संरक्षित वन क्षेत्र से अवैध रूप से बीड़ी पत्तों की तुड़ाई, भंडारण और खरीद-बिक्री और परिवहन का खेल चल रहा है तो इसमें शामिल सभी लोगों की पहचान कर उनके विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। क्षेत्र के लोगों का मानना है कि मामले की निष्पक्ष जांच से ही सच्चाई सामने आ सकेगी।

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