बेलवा डैम तैयार, पर पुरानी धारा की खुदाई अधूरी; पानी बहाव को लेकर बढ़ी ग्रामीणों की चिंता

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 पताही प्रखंड के देवापुर से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर बेलवा में बागमती नदी पर निर्मित डैम एवं रेगुलेटर का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। सभी फाटक लगाए जा चुके हैं और विभाग इस वर्ष मानसून में पहली बार नियंत्रित तरीके से पानी छोड़ने की तैयारी में है।

यह पानी बागमती की पुरानी धारा से होकर आगे मुजफ्फरपुर की बूढ़ी गंडक नदी तक पहुंचाया जाएगा। हालांकि परियोजना की सफलता के लिए जरूरी पुरानी धारा की उड़ाही (खुदाई) का कार्य अब भी अधूरा है, जिससे स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है।

विभागीय आंकड़ों के अनुसार परियोजना की कुल स्वीकृत लागत 79 करोड़ 93 लाख 20 हजार 76 रुपये है। इसके विरुद्ध अब तक 69 करोड़ 51 लाख 88 हजार 249 रुपये खर्च किए जा चुके हैं। डैम और रेगुलेटर का निर्माण लगभग पूर्ण हो चुका है तथा सभी फाटक तैयार हैं।

विभाग का कहना है कि बाढ़ के समय अतिरिक्त पानी को नियंत्रित कर पुरानी धारा की ओर मोड़ा जाएगा, जिससे बागमती के जलस्तर को नियंत्रित करने और जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

दूसरी ओर कई स्थानों पर पुरानी धारा की उड़ाही अधूरी है। मानसून की शुरुआत के साथ बारिश बढ़ने पर खुदाई कार्य प्रभावित होने की आशंका है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि धारा की पूरी सफाई नहीं हुई तो डैम से छोड़े जाने वाले पानी का सुचारु प्रवाह कैसे सुनिश्चित होगा।

देवापुर के रवि भूषण झा, संजीत झा और मदन झा ने बताया कि वर्षों से इस परियोजना से क्षेत्रवासियों को बड़ी उम्मीदें रही हैं, लेकिन अब तक इसका पूरा लाभ नहीं मिल पाया है। उनका कहना है कि मानसून सिर पर है और लोगों को आशंका है कि कहीं इस बार भी परियोजना अधूरी न रह जाए।

ग्रामीणों का मानना है कि बागमती की पुरानी धारा के पूरी तरह पुनर्जीवित होने से देवापुर, खोरीपाखर, लहसुनिया, जिहुली, मोहम्मदपुर और पदुमकेर समेत आसपास के इलाकों तथा शिवहर जिले के कई क्षेत्रों में बाढ़ का दबाव कम हो सकता है। साथ ही किसानों को सिंचाई और जल निकासी की बेहतर सुविधा मिलने की उम्मीद है।

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