राजौरी बना जम्मू-कश्मीर का नया बायोडायवर्सिटी हॉटस्पॉट, जिले की मनवार तवी में मिला दुर्लभ इंडियन रूफ्ड कछुआ

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 जम्मू-कश्मीर के वन्यजीव संरक्षण विभाग को राजौरी जिले में एक महत्वपूर्ण जैव विविधता उपलब्धि हासिल हुई है। विभाग ने मनवार तवी क्षेत्र से दुर्लभ इंडियन रूफ्ड कछुआ (पंगशुरा टेक्टा) का सफलतापूर्वक दस्तावेजीकरण किया है, जो इस क्षेत्र में इस प्रजाति की पहली प्रमाणिक उपस्थिति मानी जा रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह खोज प्रजाति के ज्ञात वितरण क्षेत्र के उत्तर-पश्चिमी विस्तार का संकेत देती है और पीर पंजाल क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता को उजागर करती है। जानकारी के अनुसार, स्थानीय लोगों द्वारा मनवार तवी में कछुए जैसी एक प्रजाति दिखाई देने की सूचना वन्यजीव विभाग को दी गई थी।

इसके बाद वन्यजीव वार्डन राजौरी-पुंछ प्रभाग नदीम इकबाल और रेंज अधिकारी इफ्तिखार एच खान के नेतृत्व में टीम ने मौके पर पहुंचकर जीव को सुरक्षित रेस्क्यू किया। जांच के दौरान इसकी पहचान इंडियन रूफ्ड कछुए के रूप में की गई।

वन्यजीव वार्डन नदीम इकबाल ने बताया कि यह मध्यम आकार का मीठे पानी का कछुआ है, जो मुख्य रूप से भारत, नेपाल, बांग्लादेश और पाकिस्तान के इंडो-गंगा मैदानी नदी तंत्रों में पाया जाता है। हालांकि, जम्मू-कश्मीर के पीर पंजाल क्षेत्र और आसपास के इलाकों से इस प्रजाति के प्रमाणिक रिकॉर्ड बेहद कम या लगभग अनुपस्थित रहे हैं। ऐसे में राजौरी से इसकी उपस्थिति का दर्ज होना जैव-भौगोलिक और संरक्षण दोनों दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

टर्टल की दस्तक ने बदला जैव-भौगोलिक नक्शा

उन्होंने बताया कि इस खोज से यह संकेत मिलता है कि राजौरी और पीर पंजाल क्षेत्र के जलीय पारिस्थितिकी तंत्र में अभी भी कई दुर्लभ और कम ज्ञात प्रजातियां मौजूद हो सकती हैं। यह खोज वन्यजीव वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के लिए भी अध्ययन का नया विषय बन गई है। रेंज अधिकारी इफ्तिखार एच खान ने बताया कि इस प्रजाति की पहचान इसकी छत के आकार की उभरी हुई खोल (कारापेस), जैतूनी-भूरे रंग और धीमी गति से बहने वाले मीठे पानी के स्रोतों में रहने की क्षमता से होती है।

यह सर्वाहारी प्रजाति है और जलीय वनस्पतियों, शैवाल, कीटों, घोंघों तथा अन्य जैविक पदार्थों को खाकर जल पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि राजौरी में इस कछुए की उपस्थिति इस बात का संकेत है कि क्षेत्र के जलीय आवास अपेक्षा से कहीं अधिक समृद्ध जैव विविधता का समर्थन कर रहे हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों ने कहा कि यह खोज जम्मू-कश्मीर में मीठे पानी के सरीसृपों पर व्यापक वैज्ञानिक सर्वेक्षणों की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है।

विभाग ने कहा कि राजौरी में इंडियन रूफ्ड टर्टल का दस्तावेजीकरण केवल एक नई प्रजाति का रिकॉर्ड नहीं, बल्कि क्षेत्र की जैव विविधता को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। रेंज अधिकारी इफ्तिखार एच खान ने स्थानीय लोगों से अपील की कि वे नदियों और जल स्रोतों में कचरा न फेंकें तथा अवैध खनन गतिविधियों से दूर रहें।

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