जहां पुरुषों की एंट्री बैन, वहां भी पुरुष गार्ड, डीएमसीएच में व्यवस्था पर सवाल

उत्तर बिहार के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान डीएमसीएच (दरभंगा मेडिकल कालेज अस्पताल) महिला निजता को लेकर संजीदा नहीं है। अस्पताल के पर्ची काउंटर से लेकर गायनिक लेबर रूम (पुरुष प्रतिबंधित क्षेत्र), कालेज, हास्टल आदि जगहों की सुरक्षा सिर्फ पुरुष गार्डों के हवाले हैं।

पर्ची काउंटर की कतार और लेबर रूम द्वार जैसे स्थानों पर पुरुष गार्ड देख सुदूरवर्ती गांव-देहात से आनेवाली महिलाएं असहज हो जाती है। शहरी एरिया की तो महिलाएं सवाल उठाने लगती है।

महिला की भीड़ में पुरुष गार्ड से सामना होने कई महिला सुरक्षा कर्मी को बुलाने की मांग करने लगती है। वहीं रोगियों के महिला स्वजन के द्वारा हो-हंगामा आदि करने पर भी पुरुष सुरक्षा गार्ड बेबस बन जाते हैं।

तोड़फोड़ और शोर मचा रही महिलाओं को काबू और पकड़-धकड़ करने में निजता भंग होने की समस्या के चलते गार्ड दर्शक बन जाते हैं। बता दें कि डीएमसीएच परिसर में सुरक्षा बंदोबस्त की जिम्मेदारी निजी एजेंसी को मिली हुई है।

एजेंसी के करीब ढ़ाई सौ डंडाधारी गार्ड मेडिकल कालेज और अस्पताल की सुरक्षा का दायित्व निभा रहे हैं। इन्हें तीन शिफ्ट में ओपीडी, इमरजेंसी, विभिन्न वार्ड, कालेज, होस्टल और परिसर के देखभाल की जिम्मेदारी है। इसके बावजूद डीएमसीएच में बाइक, मोबाइल, गहने सहित नल आदि की चोरी रोजाने की समस्या है।

महिला बिचौलियों की धर-पकड़ मुश्किल

डीएमसीएच परिसर में दवा, जांच आदि कार्य कराकर कमाई करनेवाले बिचौलिए भरे हैं। इनकी टीम में करीब दर्जन भर महिलाएं हैं। जो महिला रोगी और स्वजन को अपने जाल में फंसाकर निजी अस्पताल, जांचघर आदि पहुंचा देती है। कई बार ऐसी महिला बिचौलिए की स्वजन से तू-तू, मे-मे हो जाती है।

पिछले महीने ही सर्जरी ब्लाक के ग्राउंड फ्लोर में एक महिला बिचौलिए को महिला स्वजन ने पकड़ लिया। दोनों के बीच मारपीट होती रही और सुरक्षा कर्मी पुरुष होने के कारण महिलाओं को अलग नहीं कर पाएं। जानकारों का कहना है कि सेंट्रल ओपीडी में ऐसी घटना रोजाना होती है।

बिचौलिए के साथ दर्जनों महिलाएं ठगी और पाकेटमारी के लिए मंडराती है। जिन्हें पकड़ने में पुरुष सुरक्षा गार्डों को परेशानी होती है। इसका लाभ उठाकर बिचौलिए और ठगी के कार्य में संलिप्त महिलाओं को मिल रहा है।

डीएमसीएच परिसर में महिला सुरक्षा गार्ड की तैनाती को लेकर स्टूडेंट भी कई बार सवाल उठा चुके हैं। पूर्व अधीक्षक डा. अलका झा के कार्यकाल में गन-धारी पुरुष-महिला सुरक्षा कर्मियों की बहाली पर सहमति भी बनी। फिर भी स्थिति यथावत बनी है।

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