गधे कैसे बन रहे हैं पाकिस्तान की GDP के लिए बूस्टर डोज, क्यों है इनकी डिमांड; कितना बड़ा है गधा उद्योग?

ग्लोबल ट्रेड में हर देश अपनी वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात के लिए जाना जाता है, जहां भारत आईटी सर्विसेज के एक्सपोर्ट के लिए बड़ी पहचान रखता है तो पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान, कपड़ों के साथ-साथ गधों के निर्यात (Donkey Export) के लिए दिन ब दिन मशहूर होता जा रहा है। वैसे तो गधे पाकिस्तान की ग्रामीण अर्थव्यस्था के लिए काफी मायने रखते हैं लेकिन पिछले कुछ वर्षों में निर्यात के चलते गधों ने पाकिस्तान की इकोनॉमी में एक खास जगह बना ली है।

पाकिस्तान में गधे और गधा उद्योग क्या मायने रखता है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पाकिस्तान में पेश होने वाले आर्थिक सर्वेक्षण में गधों का जिक्र होता है।

सरकारी आंकड़ों में गधों का जिक्र

साल 2024 में जब पाकिस्तान ने अपना आर्थिक सर्वेक्षण जारी किया है, तो बताया कि मुल्क में गधों की आबादी में हुई वृद्धि में है। वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान इनकी आबादी में 1.72% की वृद्धि हुई है और यह 59 लाख तक पहुंच गई है। आंकड़ों से पता चलता है कि इनकी संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है: 2019-2020 में 55 लाख, 2020-21 में 56 लाख, 2021-22 में 57 लाख और 2022-23 में 58 लाख, जबकि 2023-24 में यह बढ़कर 59 लाख हो गई। ये तो हो गए पाकिस्तान में गधों की संख्या के आंकड़े, अब आपको हम पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में गधों के योगदान के बारे में बताते हैं…

गधे हैं आजीविका का साधन

भारत की तरह पाकिस्तान भी कृषि प्रधान देश है और इसलिए यहां पशुधन की महत्वपूर्ण भूमिका है। इथियोपिया और चीन के बाद दुनिया में गधों की तीसरी सबसे बड़ी आबादी पाकिस्तान में है। वैसे तो गधों की बात करना अक्सर मजाक होता है लेकिन पाकिस्तान की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और विदेशी मुद्रा भंडार के लिए एक अहम संपत्ति बनता जा रहा है।

पाकिस्तान में सस्ता परिवहन: पड़ोसी मुल्क में गधे, ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में परिवहन का सबसे सस्ता और सुलभ साधन हैं। इनका उपयोग कृषि उपज, निर्माण सामग्री (ईंट, रेत) और अन्य माल ढोने के लिए किया जाता है। ऐसे में 80 लाख ग्रामीण परिवार जो पशुपालन से जुड़े हैं उनके लिए गधा आजीविका कमाने का एक अच्छा साधन है।

गधों की डिमांड और निर्यात

हाल के वर्षों में पाकिस्तान में गधे, विदेशी निर्यात के लिए अहम साधन बन चुके हैं, और इनका सबसे बड़ा खरीदार चीन है। दरअसल, चीन में गधों की भारी मांग है क्योंकि यहां गधे की खाल से निकलने वाले कोलेजन का उपयोग ‘एजियाओ’ नामक पारंपरिक दवा और कॉस्मेटिक गुड्स बनाने में होता है। लेकिन, चीन में गधों की संख्या घट रही है इसलिए पाकिस्तान से गधों का निर्यात बढ़ने लगा है। चीन पहले नाइजर और बुर्किना फासो से गधे आयात करता था, लेकिन इन दोनों पश्चिम अफ्रीकी देशों द्वारा निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के बाद उसने पाकिस्तान से गधे आयात करना शुरू कर दिया।

Chinafile पर एक पाकिस्तानी पत्रकार ने बताया कि गधों के निर्यात को बढ़ावा देने के मकसद से पाकिस्तान सरकार ने पंजाब प्रांत के ओकारा जिले में 3,000 एकड़ से अधिक का एक फार्म स्थापित किया है, जिसमें अमेरिकी नस्ल समेत “बेहतर नस्लों” के गधों का पालन-पोषण किया जाता है।

विदेशी मुद्रा कमाने के लिए पाकिस्तान ने विशेष रूप से गधों के फार्म और स्लॉटरहाउस (बूचड़खाने) बनाए हैं। पाकिस्तान सरकार के अनुमान के अनुसार, गधों के मांस और खाल के निर्यात से देश सालाना लगभग करीब 2,500 करोड़ रुपये कमा सकता है।

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