जिम्मेदारों की लापरवाही से पहले ही हापुड़ जिले में दर्जनभर एक्सीडेंट प्वाइंट हैं। वहां पर अक्सर हादसे होते रहते हैं। जरा सी असावधानी लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ जाती है।
सड़क सुरक्षा की मासिक बैठक में हर बार आदेश-निर्देश देने की खानापूर्ति की जाती है, उसके बावजूद सुधार नहीं होता है।
वहीं, अधिकारी नए-नए एक्सीडेंट प्वाइंट बनाते जा रहे हैं। अब जिला अस्पताल के मार्ग पर एक नया हादसों वाला स्थान तैयार कर दिया है। वहां पर सड़क पर ही विद्युत पोल लगा दिए हैं। उनसे बड़ा हादसा हो सकता है।
सड़क , पुल व पुलिया निर्माण के दौरान एक्सपर्ट से कई ऐसी गड़बड़ी हो जाती हैं, जो सफर को असुरक्षित कर देती है। ऐसे स्थानों पर बड़ी सावधानी से निकलना होता है, अन्यथा जरा सी लापरवाही जिंदगी पर भारी पड़ सकती है। जिले में ऐसे डेढ़ दर्जन घोषित स्थान हैं। इनको ब्लैक स्पाट कहा जाता है।
लोगों द्वारा ठीक कराने की मांग उठाई
वहीं, शहर में मोदीनगर-मेरठ रोड का पुल, तहसील चौराहा, अंबेडकर तिराहा और ततारपुर क्रॉसिंग आदि दर्जनों स्थान ऐसे हैं, जो हाईरिस्क जोन में हैं, लेकिन अभी प्रशासन की सूची का हिस्सा नहीं हैं। इन स्थानों पर एक ओर जहां दिनरात पुलिस लगी रहती है, वहीं वाहनों को धीमी गति से सावधानीपूर्वक निकालना होता है। इनको ठीक कराने की मांग लोगों द्वारा उठाई जा रही हैं।
वहीं, जिम्मेदार अभी भी लापरवाही नहीं छोड़ रहे हैं। प्रत्येक निर्माण में एक-दो ऐसी गड़बड़ी कर देते हैं, जो जानलेवा हो सकती हैं। ऐसा ही एक मामला दस्तोई रोड पर जिला अस्पताल मार्ग का है। यहां पर पावर कारपोरेशन ने सड़क पर ही पोल खड़े कर दिए हैं। दो पोल सड़क के अंदर लगाकर उन पर केबल बक्सा लगाया गया है। यह बीच सड़क में आ रहे हैं।
कोई अधिकारी इसको गंभीरता से नहीं ले रहा
इस मार्ग पर गंभीर रोगियों को जिला अस्पताल में पहुंचाने के लिए एंबूलेंस व अन्य वाहन तेज गति से निकलते हैं। ऐसे में जरा सा ध्यान भटकने पर वाहन हादसे का शिकार हो जाएगा। अंधेरा व कोहरा होने पर भी यहां पर हादसा होने की आशंका बनी रहेगी। दरअसल, चालक कोहरे व घने अंधेरे में वाहन को सड़क किनारे की सफेद पट्टी के आधार पर चलाते हैं। ऐसे में यहां पर हादसा होना तय है। उसके बावजूद कोई अधिकारी इसको गंभीरता से नहीं ले रहा है।


