उत्तरकाशी में दलितों को धार्मिक यात्रा से रोका, अनुसूचित जाति आयोग ने लिया संज्ञान

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद स्थित भटवाड़ी ब्लाक के भराण गांव में दलितों को धार्मिक यात्रा में शामिल होने से रोके जाने का मामला सामने आया है।

यह घटना बीते 25 मई को गंगा दशहरा के पर्व पर सामने आई, जिसमें दलित समाज के लोगों ने उनकी देवी भगवती की डोली को भी यात्रा में शामिल करने की इच्छा जताई। लेकिन, सवर्ण समाज के लोगों ने इससे साफ इनकार कर दिया।

यात्रा में शामिल होने से रोके जाने से आहत दलित वर्ग के लोग धार्मिक यात्रा में शामिल नहीं हुए। घटना के बाद गांव में दलित व सवर्ण आमने-सामने हैं। इधर, उत्तराखंड अनुसूचित जाति आयोग ने भी इस मामले का संज्ञान लेते हुए पुलिस अधीक्षक उत्तरकाशी को पत्र लिखकर मामले में छह दिन के अंदर अपनी विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

बीते 25 मई को गंगा दशहरा पर्व से जुड़ी घटना

जिला मुख्यालय उत्तरकाशी से लगी वरुणाघाटी के भराण गांव के ग्राम प्रधान राजेंद्र लाल ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि यह घटना की बीते 25 मई को गंगा दशहरा पर्व से जुड़ी है। गांव में दो देव डोलियां हैं। इनमें से एक सोमेश्वर देवता की डोली पूरी ग्राम सभा की है।

वहीं, एक अन्य मां भगवती की डोली है, जो कि दलित वर्ग से जुड़े लोगों ने बनाई है। बताया कि पूर्व में देवी के जागर लगाए जाते थे। लेकिन जागर बंद होने के बाद मां भगवती की अलग से डोली बनाई गई। बताया कि गांव में गंगा दशहरा पर्व की तैयारी चल रही थी, जिसमें देव डोलियों को गंगोत्री धाम में स्नान के लिए ले जाया जाना था।

इसके लिए गांव के सभी लोगों से 400-400 रुपये चंदा भी एकत्रित किए गए थे। लेकिन, सवर्ण समाज ने दलितों की मां भगवती की डोली को यात्रा में शामिल करने व उनसे चंदे की धनराशि लेने से भी मना कर दिया। इस विवाद से नाराज होकर दलित समाज के लोग यात्रा में शामिल नहीं हुए। हालांकि दलित वर्ग से ही आने वाले ग्राम प्रधान जरूर धार्मिक यात्रा में शामिल हुए।

ग्राम प्रधान राजेंद्र लाल ने भी इस विवाद पर नाराजगी जताई। कहा कि पूर्व में सोमेश्वर देवता की मुख्य डोली उपरीकोट गांव में ही होती थी। बाद में भराण गांव व खुरकोट गांव के ग्रामीणों ने अलग से सोमेश्वर देवता की डोली बनाई।

बताया कि पूर्व सभी ग्रामवासियों ने उपरीकोट के सोमेश्वर देवता से यात्रा को लेकर पूछा था, जिसमें देवता ने दोनों डोलियों के साथ जाने पर सहमति जताई थी। लेकिन बाद में जब अपने गांव के सोमेश्वर देवता के पुजारी से पूछा गया तो उसने आपत्ति की, जिसमें एक डोली को वाहन व दूसरे को कंधे पर ले जाने को कहा गया। इस विवाद के चलते दलित समाज के लोगों ने धार्मिक यात्रा से दूरी बनाई।

ग्राम प्रधान ने धार्मिक पूजा-पाठ से जुड़े मामलों में इस तरह के विवाद होने पर दुख जताया। इधर, क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य हीरा लाल शाह ने बताया कि विवाद ज्यादा बड़ा नहीं है, दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर विवाद का निस्तारण करने का प्रयास किया जाएगा।

अनुसूचित जाति आयोग ने लिया संज्ञान

इस मामले का उत्तराखंड अनुसूचित जाति आयोग ने भी संज्ञान लिया है। आयोग की सदस्य एवं टिहरी व उत्तरकाशी जनपद प्रभारी सुनीता देवी की सूचना पर आयोग की सचिव कविता टम्टा ने इस मामले में पुलिस अधीक्षक उत्तरकाशी कमलेश उपाध्याय को पत्र जारी किया है, जिसमें अनुसूचित जाति आयोग अधिनियम से संबंधित धाराओं में मामले की जांच कर अपनी विस्तृत रिपोर्ट दो जून तक उपलब्ध कराने को कहा गया है।

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