निधिवन में शाम 7 बजे के बाद क्यों नहीं रुकता कोई? हैरान कर देंगे इस जगह से जुड़े अद्भुत रहस्य

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मथुरा-वृंदावन का निधिवन सनातन धर्म के सबसे रहस्यमयी और अलौकिक स्थानों में से एक है। भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी के इस पवित्र धाम से जुड़े कई ऐसे रहस्य हैं, जिनका पता आजकर कोई नहीं लगा पाया है। आइए जानते हैं निधिवन से जुड़ी कुछ बेहद खास और हैरान कर देने वाली बातें।

भक्तों का है अटूट विश्वास

एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा के अनुसार, वृंदावन का निधिवन एक ऐसा अलौकिक और रहस्यमयी स्थान है। जहां माना जाता है कि आज भी हर रात श्री कृष्ण, राधा रानी और अपनी गोपियों के साथ रासलीला करते हैं। निधिवन में विशेष आकार के तुलसी वृक्ष हैं, जिनके बारे में यह अटूट विश्वास है कि ये पौधे रात होते ही गोपियों का रूप धारण कर लेते हैं।

ऐसी मान्यता है कि यदि कोई भी मनुष्य रात के समय वहां रुककर उस दिव्य दृश्य को देखने का प्रयास करता है तो वह किसी को कुछ बताने की स्थिति में नहीं रहता है। उस अलौकिक ऊर्जा और दृश्य के प्रभाव से व्यक्ति का मानसिक संतुलन पूरी तरह खराब हो जाता है। यही कारण है कि शाम सात बजे की आरती के बाद इस पवित्र वन के पट बंद कर दिए जाते हैं और वहां किसी भी मनुष्य या पशु-पक्षी को रुकने की अनुमति नहीं होती है।

निधिवन से जुड़ी अन्य खास बातें

आमतौर पर पेड़-पौधों की शाखाएं ऊपर यानी आकाश की तरफ बढ़ती हैं, लेकिन निधिवन के जंगल में मौजूद तुलसी के पेड़ों की शाखाएं ऊपर जाने के बजाय नीचे जमीन की तरफ झुकी हुई हैं। ये पेड़ आकार में छोटे हैं और आपस में इस तरह गुंथे हुए हैं जैसे एक-दूसरे का हाथ पकड़े खड़े हों। धार्मिक मान्यता है कि रात के समय ये पेड़ ही गोपियां बनकर भगवान कृष्ण के साथ रास रचाते हैं।

विश्राम के लिए आते हैं श्री राधा-कृष्ण

निधिवन के मुख्य मंदिर परिसर के भीतर ‘रंगमहल’ नामक एक अत्यंत पवित्र स्थान है, जहां की परंपरा और मान्यताएं किसी को भी हैरत में डाल सकती हैं। हर रात मंदिर के पुजारियों द्वारा यहां एक पलंग सजाया जाता है। इसके साथ ही दातुन, पीने के पानी से भरा पात्र और राधा रानी के लिए शृंगार की सामग्री रखी जाती है।

हैरान करने वाली बात यह है कि जब सुबह मंदिर के कपाट खोले जाते हैं, तो इस्तेमाल की हुई दातुन मिलती है, पानी का पात्र आधा खाली रहता है और शृंगार का सामान भी अस्त-व्यस्त मिलता है। भक्तों का मानना है कि श्री राधा-कृष्ण आज भी यहां रात्रि विश्राम के लिए आते हैं।

निधिवन के आसपास जो घर मौजूद हैं, उनमें निधिवन की तरफ खुलने वाली खिड़कियां नहीं बनाई जाती क्योंकि स्थानीय लोगों का यह मानना है कि सूर्यास्त के बाद इस पवित्र वन में साक्षात दिव्य रासलीला होती है। यदि कोई भी व्यक्ति भूल से भी या कौतूहलवश इस रहस्यमयी दृश्य को देख लेता है, तो या तो उसकी आंखों की रोशनी चली जाती है या फिर वह अपना मानसिक संतुलन खो बैठता है। यही कारण है कि रात होते ही इस वन की तरफ कोई नहीं देखता।

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