बंद पड़ी कपड़ा मिलों व नजूल जमीनों से जुड़े वर्षों पुराने विवादों के समाधान की जिम्मेदारी अब राज्य सरकार ने स्टेट ट्रांसफार्मेशन कमीशन (एसटीसी) को सौंप दी है। उम्मीद है कि इससे कानपुर की बंद हो चुकी मिलों व नजूल की जमीन के उपयोग का रास्ता साफ होगा।
ब्रिटिश इंडिया कारपोरेशन (बीआइसी) की पांच मिलें, पांच बंगले व नेशनल टेक्सटाइल कारपोरेशन की पांच मिलें बंद हैं। इनकी लगभग 309 एकड़ जमीन का उपयोग नहीं हो पा रहा। नीति आयोग की तर्ज पर गठित एसटीसी प्रदेश की नीतियों, संसाधनों के बेहतर उपयोग व एक ट्रिलियन डालर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य पर काम कर रहा है।
इसके सीईओ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सलाहकार अवनीश अवस्थी बनाए गए हैं। इसके बाद से नजूल संपत्तियों के विवादों के निस्तारण की प्रक्रिया तेज हुई है। जिला प्रशासन ने बीआइसी व एनटीसी की 58 नजूल भूमियों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की, इनमें रीएंट्री, लीज समाप्ति व हाई कोर्ट में लंबित मामलों को देखा।
पता चला कि कानूनी विवादों, लिक्विडेशन प्रक्रिया व कब्जों के कारण ये फंसी हैं। अब तक 18 संपत्तियों पर रीएंट्री की कार्रवाई पूरी की जा चुकी है, जबकि लगभग 40 संपत्तियों में कंपनियों के लिक्विडेटर नियुक्त होने से कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पा रही है।
सबसे बड़ा विवाद म्योर मिल की जमीन को लेकर सामने आया, जहां प्रशासन द्वारा रीएंट्री की कार्रवाई के बाद मामला हाई कोर्ट पहुंच गया व स्थगन आदेश मिलने से प्रक्रिया रुक गई। बीआइसी की प्रमुख मिलों में लाल इमली, एल्गिन मिल एक, एल्गिन मिल दो, कानपुर टेक्सटाइल्स व ब्रस वेयर शामिल हैं।
इसके अलावा एल्गिन गेस्ट हाउस, कैनिलवर्थ, पुलिस कमिश्नर आवास, आशियाना, एवरस्ले व डेल पुराने बंगले हैं। इनका कुल क्षेत्रफल लगभग 70 एकड़ है। इनकी लीज अवधि वर्षों पहले समाप्त हो चुकी है।
वहीं, एनटीसी की म्योर मिल की 49.20 एकड़, न्यू विक्टोरिया मिल की 31.50 एकड़, स्वदेशी काटन मिल की 67.36 एकड़, लक्ष्मीरतन काटन मिल की 76.57 एकड़ व अथर्टन मिल की 15.05 एकड़ समेत कुल 239.68 एकड़ जमीन है। इसमें म्योर मिल व न्यू विक्टोरिया मिल नजूल संपत्तियां हैं।
इनकी वर्तमान बाजार कीमत हजारों करोड़ रुपये है। इन जमीनों पर नए निवेश, आवासीय परियोजनाएं, व्यावसायिक केंद्र व सार्वजनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे शहर का औद्योगिक स्वरूप बदलेगा, रोजगार व राजस्व के नए अवसर पैदा होंगे।
एडीएम वित्त एवं राजस्व विवेक चतुर्वेदी ने बताया कि सभी विवादित नजूल संपत्तियों का रिकार्ड संकलित किया गया है। जिन मामलों में कानूनी अड़चनें हैं, वहां विधिक राय लेकर आगे की कार्रवाई के लिए एसटीसी को रिपोर्ट भेजी गई है। इनके निस्तारण को लेकर अब एसटीसी से प्रयास किए जाएंगे।


