देवरिया में जलवायु परिवर्तन का बढ़ा खतरा, सूखने लगी है राप्ती की धारा

कभी बाढ़ के दौरान तबाही मचाने वाली राप्ती नदी अब अपने अस्तित्व के संकट से जूझती नजर आ रही है। जलवायु परिवर्तन, लगातार घटती वर्षा, बढ़ते प्रदूषण और जल संरक्षण के प्रभावी उपायों के अभाव ने नदी की धारा को समय से पहले ही कमजोर कर दिया है। हालात यह हैं कि कई स्थानों पर नदी का जलस्तर इतना कम हो गया है कि बच्चे पैदल ही नदी पार कर रहे हैं। विशेषज्ञ इसे आने वाले बड़े पर्यावरणीय संकट का संकेत मान रहे हैं।

नेपाल की धौलागिरि पर्वतमाला से निकलने वाली प्राचीन अचिरावती, जिसे वर्तमान में राप्ती नदी कहा जाता है, पूर्वांचल के कई जिलों के लिए जीवनरेखा मानी जाती रही है। वर्षा के दिनों में यह नदी विकराल रूप धारण कर गांवों और खेतों में तबाही मचाती है, लेकिन अब यही नदी गर्मी शुरू होते ही सिकुड़ने लगी है। पहले अप्रैल से जून के बीच नदी अपने न्यूनतम स्तर पर पहुंचती थी, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से फरवरी माह से ही इसका दायरा सिमटने लगता है।

कई घाटोंं पर अब पानी की जगह रेत का विस्तार
देवरिया जनपद के कई घाटों पर अब पानी की जगह रेत का विस्तार दिखाई देने लगा है। दूर से देखने पर नदी महज एक पतली रेखा की तरह नजर आती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ दशक पहले जहां नाव के बिना नदी पार करना संभव नहीं था, वहीं अब कई स्थानों पर लोग पैदल ही एक किनारे से दूसरे किनारे तक पहुंच जा रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, नदी का यह स्वरूप पहली बार इतना भयावह दिखाई दे रहा है।पर्यावरणविदों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में राप्ती नदी का संकट और गहरा सकता है। जल संरक्षण, नदी की सफाई, सिल्ट प्रबंधन और वर्षा जल संचयन जैसे उपायों को गंभीरता से लागू करना अब बेहद जरूरी हो गया है। वरना कभी विनाशकारी मानी जाने वाली राप्ती आने वाले समय में सूखी धारा में तब्दील हो सकती है।अपना मार्ग लगातार बदल रही है राप्ती नदी
विशेषज्ञों की मानें तो इसके पीछे केवल कम वर्षा ही नहीं, बल्कि नदी के प्राकृतिक स्वरूप में लगातार हो रहा बदलाव भी जिम्मेदार है। भूगोलविद बताते हैं कि राप्ती नदी वर्षों से अपना मार्ग बदलती रही है। कभी बरहज के समीप कटैलवा इसका संगम क्षेत्र माना जाता था, लेकिन मार्ग परिवर्तन के बाद संगम स्थल कपरवार क्षेत्र में पहुंच गया। नदी की धारा में बढ़ते घुमाव और किनारों के लगातार कटाव से बड़ी मात्रा में सिल्ट नदी तल में जमा हो रही है। इससे नदी की गहराई कम होती जा रही है और बहाव धीमा पड़ रहा है।

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