दिल्ली को दहलाने की कथित साजिश के मामले में गिरफ्तारी के बाद एक बार फिर आजमगढ़ का नाम चर्चा में आ गया है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने हाल ही में महाराष्ट्र के पुणे से आजमगढ़ निवासी 32 वर्षीय मोसैब उर्फ सोनू कलाम को गिरफ्तार किया था।
जांच में उसके निशाने पर राम मंदिर, नया संसद भवन और सैन्य प्रतिष्ठान होने की बात सामने आई थी। इसके बाद सुरक्षा और खुफिया एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। मोसैब की गिरफ्तारी के बाद जिले से जुड़े पुराने आतंकी नेटवर्क और संदिग्ध संपर्कों की फाइलें फिर से खंगाली जा रही हैं।
एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कहीं निष्क्रिय पड़े नेटवर्क दोबारा सक्रिय तो नहीं हो रहे। इसी क्रम में एटीएस वाराणसी और प्रयागराज यूनिट की टीम 13 मई को सरायमीर और निजामाबाद थाना क्षेत्र से एक-एक युवक को पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई थी। हालांकि पूछताछ के बाद अगले दिन दोनों युवकों को छोड़ दिया गया।
जिले में पुलिस और खुफिया इकाइयों की सक्रियता बढ़ा दी गई है। संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है और पुराने संपर्कों की निगरानी तेज कर दी गई है। एजेंसियां हर इनपुट को गंभीरता से लेकर जांच कर रही हैं।
कई बड़े आतंकी मामलों में आ चुका है जिले का नाम
आजमगढ़ का नाम पहले भी कई बड़े आतंकी मामलों में सामने आ चुका है। वर्ष 2008 के जयपुर सीरियल ब्लास्ट मामले में उम्रकैद की सजा पाने वाले चार दोषियों में से तीन सरवर आजमी, सैफुर्रहमान और मोहम्मद सैफ आजमगढ़ के रहने वाले हैं। बाटला हाउस मुठभेड़ के बाद ये नाम सुर्खियों में आए थे।
बाद की जांच में इनकी संलिप्तता जयपुर और अहमदाबाद धमाकों में भी सामने आई थी। रौनापार क्षेत्र के चांदपट्टी निवासी सरवर आजमी पर करीब 18 मुकदमे दर्ज बताए जाते हैं, जबकि सैफ और सैफुर्रहमान पर क्रमश: लगभग 50 और 44 मुकदमों का उल्लेख मिलता है। तीनों वर्तमान में जेल में निरुद्ध हैं।
फरार संदिग्ध अब भी चुनौती
सुरक्षा एजेंसियों के लिए जिले से जुड़े कुछ फरार संदिग्ध अब भी चुनौती बने हुए हैं। संजरपुर क्षेत्र से जुड़े बड़े साजिद, शादाब अहमद और मोहम्मद खालिद उर्फ कोढ़ी अब तक फरार हैं। एजेंसियां लंबे समय से उनकी तलाश में जुटी हैं। आशंका जताई जाती है कि ये विदेशी ठिकानों पर शरण लिए हुए हैं और किसी नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं।


