बीते लगभग दो माह से भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे MCD के शाहदरा उत्तरी जोन में बने एक नए नियम ने निगम की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दरअसल, अगर फरियादियों को जोन की उपायुक्त से मिलने जाना है तो उन्हें मोबाइल बाहर ही उनके कार्यालय सहायक को जमा करवाना पड़ेगा।
अब लोग सवाल उठा रहे हैं कि उपायुक्त के कमरे में ऐसा क्या हो रहा है कि उन्हें फरियादियों का मोबाइल बाहर रखवाना पड़ रहा है। पूर्व मेयर से लेकर फरियादी तक इस नियम पर सवाल उठा रहे हैं।
रिश्वत लेते पकड़े गए थे तत्कालीन उपायुक्त
लगभग डेढ़ माह पहले चार लाख रुपये रिश्वत लेने के आरोप में इसी जोन के तत्कालीन उपायुक्त अभिषेक मिश्रा और प्रशासनिक अधिकारी दिव्यांंशु गौतम को सीबीआई ने गिरफ्तार किया था।
इसके कुछ ही दिन बाद निलंबित चल रहे एक सहायक सैनिटरी इंस्पेक्टर ने निगम कार्यालय की तीसरी मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली थी। उसने निगम के ही कुछ अधिकारियों पर बहाली के लिए दो-दो लाख रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप लगाया था।
नई उपायुक्त ममता यादव की तैनाती के बाद लोगों को उम्मीद थी कि जोन भ्रष्टाचार मुक्त होगा। हालांकि उनके कार्यालय में अगर किसी को उनसे मिलना होगा तो अपना मोबाइल बाहर उनके कर्मचारी को जमा करवाना होगा।
पीए को सौंपा गया मोबाइल जमा कराने का काम
मोबाइल जमा करवाने का जिम्मा उनके पीए रणधीर कुमार को सौंपा गया है। रणधीर कुमार गिरफ्तार किए गए उपायुक्त अभिषेक मिश्रा के साथ भी काम कर चुके हैं।
मामले में उपायुक्त ममता यादव का कहना है कि कई लोग मोबाइल लाकर रिकार्डिंग करने लगते हैं। इसे रोकने के लिए यह नियम बनाया गया है।
पूर्व महापौर ने उठाए सवाल, वीडियो हुआ प्रसारित
मामले में पूर्व महापौर श्याम सुंदर अग्रवाल ने सवाल उठाते हुए इसे तानाशाही कदम बताया। उनका वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हो रहा है जिसमें उन्होंने कहा कि एमसीडी के कमिश्नर से मिलते समय भी लोगों को मोबाइल जमा नहीं करवाना पड़ता।
पहले से भ्रष्टाचार से घिरे शाहदरा उत्तरी जोन की कार्यप्रणाली बेहतर होनी चाहिए थी लेकिन इस प्रकार के नियम तो और संशय की स्थिति पैदा करते हैं।
अधिकारी के कमरे में जनता के हित की बात होती है, ऐसे में अगर कोई रिकार्ड भी कर ले तो उससे कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए। कुछ छिपाया जा रहा है तो उसपर संदेह होता है।


