आर्मी के ‘ऑपरेशन नेत्र’ ने लौटाई लद्दाख के 200 लोगों की रोशनी, मोतियाबिंद सर्जरी से बदली जिंदगियां

 केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में सेना की उत्तरी कमान की फायर एंड फ्यूरी कोर के आपरेशन नेत्र में 200 लोगों की आंखों की रोशनी लौट आई।

लेह में सेना का आपरेशन नेत्र 1.0 वीरवार को संपन्न हो गया। लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना व सेना की उत्तरी कमान के आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने वीरवार को समापन समारोह में हिस्सा लेकर कैंप को सफल बनाने वाले सेना के डाक्टरों को सम्मानित किया। इस दौरान आपरेशन नेत्र का लाभ उठाने वाले कई लोगों को भी सम्मान दिया गया।

200 से अधिक मोतियाबिंद की सफल सर्जरी

सेना का पांच दिवसीय आपरेशन नेत्र 26 अप्रैल से 30 अप्रैल तक लेह के आर्मी जनरल अस्पताल में आयोजित हुआ। आपरेशन सद्भावना के तहत आयोजित किए गए इस कार्यक्रम के तहत दूरदराज़, सीमावर्ती गांवों से आए 200 से अधिक मोतियाबिंद मरीजों की सफल सर्जरी की गई। इससे उनकी दृष्टि बहाल हो सकी।

सेना ने पिछले तीन महीनों में लद्दाख के दूरदराज तांगत्से, चुशुल, न्योमा, नुब्रा घाटी जैसे इलाकों के साथ कारगिल क्षेत्र में आयोजित नेत्र शिविरों के जरिए 950 से अधिक लोगों को गुणवत्तापूर्ण नेत्र चिकित्सा सेवाएं प्रदान की हैं।  समापन समारोह में मुख्यअतिथि के रूप में शामिल हुए लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने क्षेत्र के निवासियों की लोगों की ओर से भारतीय सेना के प्रति आभार व्यक्त किया।

एसएनएम अस्पताल की टीम की भी की सराहना

उन्होंने लोगाें को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने की इस पहल को जनसेवा का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। इस अवसर पर उत्तरी कमान के आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल), दिल्ली के नेत्र विशेषज्ञों की टीम व सहयोग देने वाले लेह के एसएनएम अस्पताल की टीम की भी सराहना की।

आर्मी कमांडर ने कहा कि आपरेशन नेत्र 1.0 भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन इसका प्रभाव लोगों के जीवन में लंबे समय तक बना रहेगा। उन्होंने कहा कि यह आपरेशन भविष्य में ऐसे और अभियानों का मार्ग प्रशस्त करेगा। आर्मी कमांडर ने बताया कि इस पहल से न केवल मरीजों की आंखों की रोशनी लौटी है, अपितु उनके जीवन की गुणवत्ता में भी महत्वपूर्ण सुधार हुआ है।

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