यूपी के दो तालाब बने राज्य संरक्षित वेटलैंड, साइबेरिया-जापान से आने वाले मेहमान पक्षियों को मिलेगा नया जीवन

 तपोभूमि के दो प्रमुख जलाशय अब पर्यावरणीय दृष्टि से संरक्षित धरोहर बन गए हैं। प्रदेश सरकार ने पहाड़ी ब्लॉक के अशोह गांव स्थित सिंघानिया तालाब और बछरन ग्राम पंचायत के बड़ा तालाब को राज्य संरक्षित वेटलैंड (आद्रभूमि) घोषित कर अधिसूचना जारी कर दी है।

जिले में पहली बार किसी जलाशय को कानूनी संरक्षण मिला है। इससे न केवल जैव विविधता संरक्षण को मजबूती मिलेगी बल्कि भूजल संरक्षण, प्रवासी पक्षियों के संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन को भी लाभ मिलेगा।

वन एवं वन्यजीव विभाग द्वारा वेटलैंड (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम-2017 के तहत जारी अधिसूचना के बाद दोनों तालाबों के 50 मीटर दायरे में अतिक्रमण, खनन, भूमि उपयोग परिवर्तन, कचरा व सीवेज डालने जैसी गतिविधियां पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगी।

अवैध मत्स्य आखेट और भूजल दोहन पर भी रोक लगेगी। रानीपुर टाइगर रिजर्व के उप प्रभागीय वनाधिकारी राजीव रंजन सिंह ने बताया कि जिले से कुल आठ वेटलैंड का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था, जिनमें फिलहाल दो को अधिसूचित किया गया है। उन्होंने बताया कि इन जलाशयों में सर्दियों के दौरान साइबेरिया, रूस, ऑस्ट्रेलिया, जापान और तिब्बत समेत कई देशों से प्रवासी पक्षी पहुंचते हैं। यहां साइबेरियन क्रेन, पेलिकन, सुरखाब, बार-हेडेड गूज और ब्लैक-हेडेड गल समेत कई दुर्लभ प्रजातियां देखी जाती हैं।

वन विभाग अब दोनों वेटलैंड का सीमांकन कराएगा। साथ ही सीमा स्तंभ, सूचना बोर्ड, जैव विविधता पंजिका और स्थानीय समुदाय की सहभागिता से संरक्षण योजना लागू की जाएगी। प्रशासन की योजना यहां वाच टावर, नेचर ट्रेल और बर्ड वॉचिंग प्वाइंट विकसित कर इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने की भी है, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा।

आंकड़ों में वेटलैंड

  • बड़ा तालाब क्षेत्रफल : 3.7980 हेक्टेयर
  • सिंघानिया तालाब क्षेत्रफल : 8.3450 हेक्टेयर
  • जिले से भेजे गए वेटलैंड प्रस्ताव : 8
  • जिले में संभावित वेटलैंड : लगभग 20
  • प्रवासी व स्थानीय पक्षियों की प्रजातियां : 40 से अधिक
  • प्रतिबंधित क्षेत्र : 50 मीटर परिधि

क्यों खास हैं ये वेटलैंड

दोनों तालाब केवल जलस्रोत नहीं बल्कि जैव विविधता के बड़े केंद्र हैं। गर्मी में भूजल रिचार्ज और खेती के लिए पानी उपलब्ध कराने के साथ ये प्रवासी पक्षियों का प्रमुख पड़ाव भी हैं। संरक्षण मिलने से इनके प्राकृतिक स्वरूप को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।

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