जम्मू-कश्मीर सरकार ने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए लागू समूह मेडिक्लेम बीमा योजना में गंभीर खामियों और संविदात्मक दायित्वों के उल्लंघन के कारण रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को दो वर्ष के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया है।
वित्त विभाग द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि कंपनी ने लाभार्थियों को समय पर स्वास्थ्य बीमा कार्ड जारी करने, अस्पतालों की सूची उपलब्ध कराने, वेब आधारित एमआइएस प्रणाली विकसित करने और जिला स्तर पर कियोस्क कार्यालय स्थापित करने जैसे महत्वपूर्ण दायित्वों का पालन नहीं किया। इसके अतिरिक्त, काल सेंटर सेवाएं और अन्य आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं कराई गईं, जिससे योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में बाधा उत्पन्न हुई।
सरकार ने पाया कि योजना के तहत जारी किए गए भारी-भरकम प्रीमियम के बावजूद कई सेवाएं अधूरी रहीं और बड़ी राशि अप्रयुक्त रह गई। इस मामले में आंतरिक जांच और अभिलेखों की समीक्षा के बाद यह कार्रवाई की गई। आदेश में कहा गया है कि सार्वजनिक हित, पारदर्शिता और सरकारी खरीद प्रक्रियाओं की शुचिता बनाए रखने के लिए यह कदम आवश्यक था।
रकार ने लगाई खरीद प्रक्रिया में रोक
सरकार ने स्पष्ट किया है कि आर्बिट्रेशन प्रक्रिया लंबित होने के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर ब्लैकलिस्टिंग का निर्णय लिया जा सकता है। इस निर्णय के बाद रिलायंस कंपनी अगले दो वर्षों तक जम्मू-कश्मीर सरकार की किसी भी निविदा या खरीद प्रक्रिया में भाग नहीं ले सकेगी। सरकार ने 15 अक्टूबर 2018 को ट्रिनटी रीइंश्योरेंस ब्रोकर्स लिमिटेड और रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी के साथ त्रिपक्षीय समझौता किया था। इस समझौते के अंतर्गत 3.50 लाख सरकारी कर्मचारियों के लिए प्रीमियम जारी किया गया था।
रिलायंस की लापरवाही पर सरकार सख्त
इस मामले की जांच एसीबी द्वारा की गई, जिसमें पाया गया कि रिलायंस कंपनी ने 3344 कर्मचारियों और पेंशनरों के दावों का निपटारा किया। एसीबी ने शेष अप्रयुक्त प्रीमियम राशि वसूलने की सलाह दी। सरकार ने यह भी संज्ञान लिया है कि जम्मू-कश्मीर और रिलायंस कंपनी के बीच मध्यस्थता की कार्यवाही प्रगति पर है, लेकिन यह सरकार को अपनी प्रशासनिक शक्तियों का प्रयोग करने से नहीं रोकता। इस प्रकार, रिलायंस कंपनी को दो वर्ष के लिए ब्लैकलिस्ट किया गया है, जो 30 जुलाई 2025 के आदेश के अनुपालन में प्रभावी होगा।


