उत्तर प्रदेश के सबसे लंबे एक्सप्रेसवे को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को जनता को समर्पित किया। गंगा एक्सप्रेसवे को भारत की जीवनदायिनी मानी जाने वाली गंगा नदी के किनारे-किनारे मेरठ से प्रयागराज तक विकसित किया गया है। यह देश का पहला एक्सप्रेसवे है, जिस पर ट्रॉमा सेंटर की सुविधा दी गई है। यानी दुर्घटना के बाद किसी का भी जीवन बचाने के लिए सबसे कम समय के उपयोग करने की सुविधा प्रदान की गई है।
गंगा एस्कप्रेसवे पर किसी भी दुर्घटना के बाद के सबसे कीमती समय यानी दो या तीन घंटे के गोल्डन आवर के दौरान ट्रामा सेंटर की सुविधा से लोगों का जीवन बचाने के प्रयास की सुविधा प्रदान की गई है। 594 किलोमीटर लंबे और छह लेन वाले गंगा एक्सप्रेस को 36,402 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है। इसमें आठ लेन तक विस्तार की सुविधा भी है। इस पर स्मार्ट कंट्रोल रूम वाली सुविधा के साथ ड्राइविंग के दौरान नींद की झपकी आने पर जगाने वाले फीचर का भी ध्यान रखा गया है।
गंगा एक्सप्रेसवे पर छह जिलों में सात ट्रॉमा सेंटर
12 जिलों को जोड़ रहे 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे पर छह जिलों में 50-50 हजार स्क्वाटर मीटर के जन सुविधा केंद्रों में ही सात ट्रामा सेंटर की सुविधा दी गई है। देश के बड़े प्राइवेट अस्पतालों के साथ अनुबंध कर स्थापित ट्रामा सेंटर में दुर्घटनाओं में घायल लोगों को जल्द से जल्द बेहतर उपचार की सुविधा उपलब्ध होगी। यह भारत का ऐसा पहला एक्सप्रेसवे है जहां दुर्घटना की स्थिति में तुरंत इलाज के लिए ट्रॉमा सेंटर की सुविधा दी गई है, जिसके लिए देश के बड़े निजी अस्पतालों से अनुबंध किया गया है। जन सुविधा केंद्रों पर यात्रियों के लिए रिफ्रेशमेंट सेंटर, पेट्रोल पंप व ट्रॉमा सेंटर की सुविधा होगी। इसके साथ ही उन्नत ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम और सीसीटीवी कैमरों से सुरक्षा की निगरानी की जाएगी।
किस-किस जिले में है ट्रॉमा सेंटर की सुविधा
गंगा एक्सप्रेसवे पर सात जिलों में 50-50 हजार स्क्वायर मीटर के जन सुविधा केंद्रों में ही ट्रॉमा सेंटर की सुविधा दी गई है। बदायूं के बाद शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली और प्रतापगढ़ जिला में ट्रॉमा सेंटर की सुविधा प्रदान की जी रही है। इनमें उन्नाव जिले में दो ट्रॉमा सेंटर बनाए जाएंगे। इनके साथ पेट्रोल पंप, सीएनजी स्टेशन के साथ-साथ एक साथ चार कार और दो ट्रकों को एक साथ चार्ज करने वाले ईवी चार्जिंग पॉइंट्स हैं। यह एक्सप्रेसवे 12 जिलों मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज को आपस में जोड़ेगा।
गंगा एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा के इंतजाम
यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए पूरे एक्सप्रेसवे पर हर एक किलोमीटर पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जो एक केंद्रीकृत कंट्रोल रूम से जुड़े होंगे। किसी भी वाहन के रुकने या दुर्घटना होने की स्थिति में तुरंत सूचना मिल जाएगी और संबंधित टीम मौके पर पहुंचकर सहायता करेगी। इसके अलावा, हर दस किलोमीटर पर स्पीड मानिटरिंग सिस्टम स्थापित किया गया है।
कुल 14 टोल प्लाजा
594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे पर मेरठ से प्रयागराज के बीच कुल 14 टोल प्लाजा बनाए गए हैं। इनमें मेरठ के बिजौली (खड़खड़ी) और प्रयागराज में दो मुख्य टोल प्लाजा होंगे जबकि 12 अन्य टोल प्लाजा विभिन्न प्रवेश और निकास बिंदुओं पर स्थित हैं। आईआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर ट्रस्ट टोल कंपनी ने मंगलवार रात आधिकारिक दरों को सार्वजनिक कर दिया। जिसके आधार पर कार, जीव व हल्के वाहनों के लिए टोल दरें 2.55 रुपये प्रति किमी, कामर्शियल वाहनों की 4.05 रुपये और ट्रकों पर 8.20 रुपये प्रति किमी होगी।
रोजगार के भी नए अवसरों की राह
गंगा एक्सप्रेसवे मेरठ, हापुड़, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज समेत कई जिलों से होकर गुजर रहा है। इससे इन संबंधित जिलों के लोगों को आवाजाही में आसानी तो होगी साथ ही रोजगार के भी नए अवसरों की राह खुलेगी। दावा किया जा रहा है कि गंगा एक्सप्रेसवे मेरठ से प्रयागराज तक की दूरी और समय दोनों को आधा कर देगा।
जहां पहले यही दूरी तय करने में 10 से 12 घंटे लगते थे, अब यह लंबा सफर महज 5 से 6 घंटे में पूरा होगा। इस एक्सप्रेसवे का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह यमुना एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, जेवर लिंक एक्सप्रेसवे एवं नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की ओर जाने वाले मार्ग को जोड़ रहा है। साथ ही, हरिद्वार की कनेक्टिविटी को भी आसान बनाएगा।


