भोजशाला विवाद: ‘राजा भोज के बाद कई बार लूटा गया धार’, कोर्ट में बोले मुस्लिम पक्ष के वकील

 धार जिले में स्थित भोजशाला के धार्मिक स्वरूप के निर्धारण के लिए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में चल रही सुनवाई गुरुवार को भी जारी रही।

मौला कलामुद्दीन वेलफेयर सोसायटी की ओर से अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने मस्जिद का पक्ष रखते हुए कहा कि वर्ष 1055 में राजा भोज के निधन के बाद लगभग 140 साल तक धार पर कई आक्रमण हुए। दक्षिण भारत और गुजरात के राजाओं ने यहां लूटपाट और तोड़फोड़ की।

मंदिरों को भी क्षति पहुंचाई गई। वर्ष 1305 में जब मुस्लिम यहां पहुंचे तक यहां कुछ नहीं बता था। उन्हें धार को लूटने की जरूरत ही नहीं पड़ी। निर्माण कार्य में उपलब्ध सामग्री का उपयोग किया गया।

24 अगस्त 1935 को वक्फ नोटिफिकेशन के माध्यम से विवादित संपत्ति को वक्फ संपत्ति घोषित किया जा चुका है। सलमान खुर्शीद ने तर्क दिया कि धार पर हुए आक्रमणों का धर्म से सीधा संबंध नहीं था, बल्कि वे सत्ता और वर्चस्व की लड़ाइयों का हिस्सा थे।

उस दौर में प्रतिद्वंद्वी शासक विरोधी राजाओं द्वारा निर्मित मंदिरों को नुकसान पहुंचाते थे और वहां स्थापित मूर्तियां अपने साथ ले जाकर अपने राज्य में स्थापित करते थे। इसे विजय के प्रतीक के रूप में दर्शाया जाता था।

उन्होंने कुछ पुस्तकों का संदर्भ देते हुए कहा कि वर्ष 1055-56 में कर्नाटक के राजा ने धार पर हमला कर तोड़फोड़ की। वर्ष 1070 में फिर जोरदार आक्रमण हुआ। इसमें धार पूरी तरह से तहस-नहस हो गया।

वर्ष 1071 से 1074 तक पुनर्निर्माण का प्रयास हुआ। वर्ष 1133 में गुजरात के राजा ने धार पर हमला कर कब्जा कर लिया। बार-बार हमलों में धार पूरी तरह से खत्म हो चुका था।

वक्फ एक्ट के प्रविधान भोजशाला पर लागू नहीं
कोर्ट में गुरुवार को खुर्शीद के तर्क पूरे होने के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील जैन ने तर्क रखे। उन्होंने न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की युगलपीठ को बताया कि भोजशाला वर्ष 1904 से राष्ट्रीय महत्व की संरक्षित धरोहर है। मतलब साफ है कि वक्फ एक्ट के प्रविधान इस पर लागू नहीं होते। मामले में अगली सुनवाई सोमवार 27 अप्रैल को होगी।

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