ड्रग्स तस्करी के 68.9 फीसद मामलों में सजा का नया रिकार्ड बना है। ड्रग्स तस्करी के मामलों में 2024 में 60.5फीसद मामलों में सजा हुई थी, जो 2025 में बढ़कर 65.5 फीसद हो गई। 2026 की पहली तिमाही में 68.6 फीसद मामलों में सजा का नया रिकार्ड बना है।
ड्रग्स तस्करी के मामलों में सजा का नया रिकार्ड
इंटरनेट मीडिया एक्स पर किए पोस्ट में शाह ने कहा कि हम पूरी शक्ति के साथ नशा तस्करी के हर संभावित ठिकाने और गुंजाइश को समाप्त करने के लिए दृढ संकल्पित है। गृह व सहकारिता मंत्री अमित शाह ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी।
अमित शाह ने कहा कि हमारे युवाओं को नशीले पदार्थों की महामारी से बचाने के लिए मोदी सरकार दृढता से ड्रग कार्टलों का सफाया कर रही है और उनकी सजा सुनिश्चित कर रही है। हम ड्रग रैकेटों की साँस लेने की हर एक जगह बंद करने के लिए अपनी पूरी ताकत के साथ संकल्पबद्ध हैं।
तीन महीने में 73 ड्रग अपराधियों को मिली सजा
2026 के पहले तीन महीनों में 73 ड्रग अपराधियों को दोषी ठहराकर सख्त से सख्त सजा दिलाई है। इनमें से चार अपराधियों को अधिकतम 20 वर्ष और 54 को 10 वर्ष या उससे अधिक की सजा दी गई। दोषियों पर कुल 1.22 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।
इनमें 2021 में अहमदाबाद एयरपोर्ट पर 2.75 किलोग्राम हेरोइन और 2022 में फाजिल्का इंडो-पाक बॉर्डर पर 4.23 किलोग्राम हेरोइन जब्ती का मामला शामिल हैं। इन दोनों मामलों में दो विदेशी तस्करों को 20 वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है।
एनसीबी का एक्शन
इसी तरह 2023 के स्यूडोएफेड्रिन की जब्ती के मामले में हरियाणा के सोनीपत स्थित एम/एस आल्प्स लाइफ साइंसेज के डायरेक्टर समेत तीन आरोपियों को सात वर्ष की कठोर कारावास की सजा के साथ-साथ प्रत्येक पर 1.5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।
कंपनी को भी दोषी ठहराया गया और 1.5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। साथ ही एनसीबी द्वारा कंपनी को स्यूडोएफेड्रिन निर्माण की अनुमति भी वापस ले ली गई है।एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि दोषसिद्धि में निरंतर बढ़ोतरी की वजह ड्रग्स तस्करी के मुकदमों की निगरानी पर केंद्रित रणनीति है।
एनसीबी ने अन्य केंद्रीय और राज्य प्रवर्तन एजेंसियों से अपील की है कि वे ड्रग किंगपिन्स से संबंधित महत्वपूर्ण लंबित मुकदमों की पहचान करें और प्रभावी अभियोजन सुनिश्चित करें। ड्रग कार्टेल्स को तोड़ने की यह रणनीति देश में ड्रग तस्करी की चुनौती से निपटने की प्रवर्तन रणनीति का प्रमुख तत्व है तथा सरकार की ड्रग्स के प्रति जीरो टालरेंस की नीति की पुष्टि करती है।


