हरियाणा में वर्षों से अधूरी क्षमता पर चल रहे या बंद पड़े पैक हाउस-कम-कोल्ड स्टोर अब अचानक हाॅट प्राॅपर्टी बन गए हैं। हरियाणा स्टेट एग्रीकल्चरल मार्केटिंग बोर्ड ने इन्हें 15 साल की लंबी लीज पर देने का फैसला लिया है। इससे प्रदेश में फल-सब्जी कारोबार का पूरा इकोसिस्टम बदलने की तैयारी दिख रही है।
सीधा फायदा मिलने की उम्मीद
महेंद्रगढ़ जिले के नारनौल का आधुनिक कोल्ड स्टोर भी इस लिस्ट में शामिल है, जो लंबे समय से अपनी पूरी क्षमता के उपयोग का इंतजार कर रहा था। जिससे स्थानीय किसानों और व्यापारियों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है।
करीब 15 साल पहले बनाए गए ये कोल्ड स्टोर लंबे समय से पूरी क्षमता से उपयोग में नहीं आ रहे थे। अब बोर्ड ने “जैसा है, जहां है” आधार पर इन्हें निजी क्षेत्र को सौंपने का फैसला लिया है, ताकि यहां ग्रेडिंग, पैकिंग, प्री-कूलिंग और स्टोरेज जैसी सुविधाएं दोबारा शुरू हो सकें।
सिस्टम फेल से प्राइवेट मॉडल की ओर शिफ्ट
जानकारी के अनुसार, ये सभी कोल्ड स्टोर 2010 के आसपास करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए थे, लेकिन रखरखाव और संचालन की कमी के कारण इनका पूरा फायदा किसानों को नहीं मिल पाया। अब सरकार ने अप्रत्यक्ष रूप से स्वीकार कर लिया है कि सरकारी माडल की बजाय निजी भागीदारी से ही ये प्रोजेक्ट सफल हो सकते हैं।
छोटे कारोबारियों और एफपीओ को मौका
इस बार की टेंडर प्रक्रिया में खास राहत यह दी गई है कि किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) और किसान उत्पादक कंपनी (एफपीसी) को अनुभव की शर्त से छूट दी गई है। यानी अब छोटे किसान समूह भी सीधे इस कारोबार में उतर सकते हैं। लीज की अवधि 15 साल तय की गई है, जिसे बेहतर प्रदर्शन के आधार पर 5 साल और बढ़ाया जा सकता है। शुरुआती तीन महीने का मोरेटोरियम पीरियड भी दिया जाएगा, ताकि मशीनरी की मरम्मत और सेटअप किया जा सके।
किसानों के लिए गेम चेंजर बन सकता है प्रोजेक्ट
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ये कोल्ड स्टोर सही तरीके से संचालित हुए तो किसानों को अपनी उपज का बेहतर दाम मिलेगा और बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी। खासकर नारनौल जैसे क्षेत्र में जहां सब्जी और फल उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है, वहां यह सुविधा बड़ा बदलाव ला सकती है।
प्रदेश के इन पैक हाउसों को लीज पर देने की तैयारी
प्रदेशभर में कुल 10 स्थानों पर यह लीज प्रक्रिया लागू की जा रही है, जिनमें पानीपत, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर, सिरसा, नारनौल, फरीदाबाद, करनाल, रोहतक, झज्जर और हिसार शामिल हैं। नारनौल का पैक हाउस 22×37 मीटर क्षेत्र में बना हुआ है और आधुनिक सुविधाओं से लैस है।


