लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम वर्ष 2023 में ही पारित हो चुका है। अब इसे 2029 के लोकसभा चुनाव से ही लागू करने के लिए केंद्र सरकार 16 से 18 अप्रेल तक बुलाए गए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लेकर आ रही है।
राजनीति में बड़े अवसर के रूप में महिलाओं के लिए यह दरवाजे खुलने जा रहे हैं तो उसके साथ सकारात्मक पक्ष यह भी है कि इस अवसर को भुनाने के लिए लोकतंत्र की पहली सीढ़ी पर आधी आबादी पूरी तरह से तैयार खड़ी है।
जनप्रतिनिधियों को दिया गया प्रशिक्षण
पिछले चार वर्षों में 33.50 लाख पंचायत महिला जनप्रतिनिधियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा चुका है। महिलाओं ने राजनीतिक क्षेत्र में तेजी से कदम बढ़ाए हैं। महत्वपूर्ण तथ्य है कि पंचायतीराज संस्थाओं में संविधान अनुच्छेद 243डी के तहत महिलाओं के लिए न्यूनतम एक तिहाई आरक्षण का प्रविधान है, लेकिन 21 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों ने इस प्रविधान को और मजबूत करते हुए महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत तक आरक्षण लागू किया है।
यही कारण है कि पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच चुकी है। सरकार के आंकड़ों के अनुसार, देशभर में कुल 24,41,781 निर्वाचित प्रतिनिधियों में से 12,14,885 यानी लगभग 49.75 प्रतिशत महिलाएं हैं।
यहां गौर करने वाली बात यह भी है कि बेशक इतनी बड़ी संख्या में महिलाएं स्थानीय निकायों में निर्वाचित हो जाती हों, लेकिन उनकी नेतृत्व क्षमता पर सवाल खड़े होते रहे हैं, क्योंकि दशकों तक महिला जनप्रतिनिधि प्रधान पति, पार्षद पति, जिला पंचायत अध्यक्ष पति, ब्लाक अध्यक्ष पति जैसे छद्म नेतृत्व के साये में सिमटी रही हैं।
केंद्र सरकार ने उठाए मजबूत कदम
हालांकि, मोदी शासनकाल में पंचायतीराज मंत्रालय ने इस दिशा में मजबूत कदम उठाए हैं। न सिर्फ सरकार द्वारा गठित विशेष समिति द्वारा तैयार रिपोर्ट पर इस कुप्रथा को खत्म करने के लिए काम शुरू हो गया है, बल्कि सरकार ने महिलाओं में नेतृत्व विकास करने के लिए भी ठोस रणनीति के साथ काम किया है।
यूं तो राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के तहत सभी निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण दिया जाता है, लेकिन 2022-23 से सरकार ने महिला प्रतिनिधियों के प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। मंत्रालय का दावा है कि वर्ष 2025-26 में 9,36,924 महिला प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 47.7 प्रतिशत की वृद्धि है।
वहीं, पिछले चार वर्षों की बात करें तो कुल 33.50 लाख महिला जनप्रतिनिधियों को प्रशिक्षित किया गया है। इस प्रशिक्षण में उन्हें यही बताया है कि एक जनप्रतिनिधि के दायित्व क्या हैं? वह किस तरह अपने क्षेत्र के विकास की योजनाएं तैयार करें।
महिलाओं को मिलेगी मदद
चूंकि, आम तौर पर प्रधान, ब्लॉक अध्यक्ष या जिला पंचायत अध्यक्ष जैसे चुनावों में राजनीतिक पृष्ठभूमि के परिवारों के सदस्यों की ही अधिक भागीदारी रहती है, इसलिए माना जा सकता है कि पंचायत स्तर पर यह प्रशिक्षण पा चुकी इन जनप्रतिनिधियों में से बहुतों के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में पहुंचने की राह खोलेगा।


