भारत की ऊर्जा सुरक्षा के संदर्भ में पश्चिम एशिया संकट के प्रभाव पर भारतीय नौसेना के शीर्ष कमांडर मंगलवार से तीन दिनों तक चलने वाले सम्मेलन में विचार-विमर्श करेंगे। इस अर्धवार्षिक सम्मेलन का आयोजन नई दिल्ली में किया जाएगा।
नौसेना ने रविवार को जारी एक बयान में बताया कि कमांडर राष्ट्रीय समुद्री हितों की रक्षा के लिए नौसेना की परिचालन स्थिति और राष्ट्रीय सुरक्षा उद्देश्यों के अनुरूप क्षमताओं के विकास की भी व्यापक समीक्षा करेंगे।
बयान के अनुसार, ‘यह संस्करण भारत की ऊर्जा सुरक्षा की रक्षा के लिए नौसेना की त्वरित तैनाती के संदर्भ में बहुत महत्वपूर्ण है, खासकर तब जबकि पश्चिम एशिया में संघर्ष जारी है और हिंद महासागर क्षेत्र में बहुराष्ट्रीय सेनाएं एकत्रित हो रही हैं।’
हालांकि नौसेना ने इस बारे में विस्तार से नहीं बताया कि होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों के आवागमन में आ रही रुकावटों को देखते हुए भारत की ऊर्जा सुरक्षा में उसकी क्या भूमिका है।
पिछले कई वर्षों से नौसेना भारतीय ध्वज वाले व्यापारिक जहाजों को ओमान की खाड़ी में सुरक्षा दे रही है, विशेषकर उन जहाजों को जो कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस ले आते हैं।
नौसेना ने बताया कि एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी, ऑपरेशनल कमांडरों और नौसेना के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ मिलकर मौजूदा भू-रणनीतिक माहौल में बहुआयामी चुनौतियों से निपटने की योजनाओं की समीक्षा और मूल्यांकन करेंगे। सम्मेलन में सीडीएस जनरल अनिल चौहान और केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन भी कमांडरों को संबोधित करेंगे।


