सूर्योदय के पूर्व से पूर्वाह्न तक यदि पुण्यसलिला सरयू में लाखों श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई, तो कनकभवन, दशरथमहल, मणिरामदास जी की छावनी, रामवल्लभाकुंज, लक्ष्मणकिला, जानकीमहल, हनुमानबाग, हनुमन्निवास, बड़ा भक्तमाल, जानकीघाट बड़ास्थान, चारुशिलाकुंज आदि मंदिर आस्था के केंद्र में रहे। इन मंदिरों में पूजन, अभिषेक, आरती, सत्संग, बधाई गान आदि से राम जन्मोत्सव की परंपरा, उसके निहितार्थ एवं संदेश पूरी रम्यता से उद्घाटित हुए और जिसे श्रद्धालु अपने साथ किसी थाती की तरह समेटते नजर आ।