आरबीआई की सलाह: पश्चिम एशिया की स्थिति पर भारत रखे कड़ी नजर, तैयार रहे

 आरबीआई ने अपने बुलेटिन में कहा है कि भारत को पश्चिम एशिया में बदलती परिस्थिति पर बारीकी से नजर रखनी होगी और उसके असर को कम करने के लिए पहले से ही कदम उठाने होंगे।

मार्च के बुलेटिन में आरबीआई ने यह भी बताया है कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बाहरी झटकों से बचाने के लिए पर्याप्त है, लेकिन एक आर्थिक स्थिरीकरण कोष बनाने से वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए और ज्यादा वित्तीय सुरक्षा प्राप्त होगी।

मार्च के बुलेटिन में अर्थव्यवस्था की स्थिति पर छपे एक लेख में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और अमेरिका द्वारा विभिन्न देशों के साथ किए गए व्यापारिक समझौतों को लेकर स्थिति साफ नहीं होने से वैश्विक बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। लेख में चेतावनी दी गई है कि अगर युद्ध और अनिश्चितता का दौर लंबा खिंचता है, तो यह पूरे वैश्विक परिदृश्य के लिए नुकसानदायक होगा।

लेख में कहा गया है, “चूंकि भारत कच्चे तेल के लिए बाहरी स्त्रोतों पर निर्भर है, इसलिए बदलती स्थिति पर बारीकी से नजर रखने और उसके बुरे असर को कम करने के लिए पहले से ही कदम उठाने की जरूरत है।”

हालांकि, लेख में यह भी कहा गया है कि बाहरी झटकों को झेलने की भारतीय अर्थव्यवस्था की क्षमता और मजबूती समय के साथ बढ़ी है और इसे मजबूत आर्थिक बुनियादी ढांचे से और भी बल मिला है। ऊर्जा सुरक्षा के मामले में भारत धीरे-धीरे अपने कच्चे तेल के आयात के स्त्रोतों में विविधता लाया है और अपनी घरेलू रिफाइनिंग क्षमता को बढ़ाया है।

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