फसलों और पादप की देसी प्रजातियों के अस्तित्व के लिए बड़ा संकट बनीं विदेशी पादप प्रजातियां अब देश में नहीं पनप पाएंगी। पारिस्थितिकी और भारतीय सामाजिक-आर्थिक संतुलन के लिए खतरा बन रही ऐसी विदेशी पादप प्रजातियों की पहचान और उनसे निपटने के लिए राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) ने एक विशेषज्ञ समिति गठित की है।
यह फैसला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देश के बाद लिया गया, जिसमें स्वत: संज्ञान लेते हुए विदेशी प्रजातियों के स्थानीय जैव विविधता, प्रमुख पारिस्थितिकी तंत्र, कृषि, खाद्य सुरक्षा और मानव तथा वन्यजीव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले गंभीर असरों को उजागर किया गया था।
खतरा बन रही विदेशी प्रजातियां
समिति को राज्य-वार इनपुट के आधार पर खतरा बन रही विदेशी प्रजातियों की सूची तैयार करने, उच्च जोखिम वाली प्रजातियों की पहचान और प्राथमिकता तय करने, विज्ञान आधारित प्रबंधन रणनीतियों तथा पारिस्थितिकी बहाली उपायों की सिफारिश करने का कार्य सौंपा गया है।
इसके अतिरिक्त समिति को उनकी रोकथाम, नियंत्रण और उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर दिशा-निर्देश तैयार करने के लिए भी कहा गया है। एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि यह समिति सर्वोत्तम प्रणालियों का दस्तावेजीकरण और प्रसार भी करेगी। दीर्घकालिक प्रबंधन और नीतियों को मजबूत करने के लिए अनुसंधान और डाटा सृजन कार्यक्रमों का प्रस्ताव भी देगी।


