खनिज परिवहन की निगरानी व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए सरकार अब तकनीकी स्तर पर सख्ती बढ़ाने की तैयारी में है। हाल ही में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में वाहन ट्रैकिंग सिस्टम में लोकेशन से छेड़छाड़ (फर्जी लोकेशन दिखाने) के मामलों को गंभीरता से लेते हुए कई अहम सुझाव सामने आए। खान एवं भू-तत्व विभाग के स्तर पर इस बैठक का आयोजन किया गया था।
बैठक में शामिल राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के प्रतिनिधि ने स्पष्ट किया कि वर्तमान व्यवस्था में समर्पित इंटरनेट रेंज नहीं होने के कारण वाहनों की वास्तविक लोकेशन छुपाने या बदलने की आशंका बनी रहती है। इस स्थिति में अवैध खनन और परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण करना मुश्किल हो जाता है।इसे देखते हुए एनआईसी ने परिवहन विभाग से आग्रह किया कि वाहन ट्रैकिंग डिवाइस बनाने वाली कंपनियों को मशीन-से-मशीन (एम 2 एम) के लिए अलग और सुरक्षित इंटरनेट रेंज अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने का निर्देश दिया जाए।
बैठक में यह भी जोर दिया गया कि डेटा सुरक्षा के लिए ठोस और कड़े उपाय लागू किए जाएं। खनन से जुड़े सभी सॉफ्टवेयर और ऑनलाइन पोर्टल की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करने का सुझाव दिया गया, ताकि किसी भी तरह की तकनीकी खामी को समय रहते दूर किया जा सके।
साथ ही, सिस्टम में ऐसी व्यवस्था विकसित करने पर बल दिया गया, जिससे किसी भी प्रकार की छेड़छाड़, संदिग्ध गतिविधि या नियमों के उल्लंघन की स्थिति में स्वत: अलर्ट जनरेट हो और संबंधित अधिकारियों को तत्काल सूचना मिल सके।
अधिकारियों का मानना है कि इन उपायों के लागू होने से खनिज परिवहन की रीयल-टाइम निगरानी अधिक विश्वसनीय होगी और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।


