झारखंड हाई कोर्ट में लोकायुक्त, सूचना आयुक्त समेत अन्य संवैधानिक पदों पर नियुक्ति को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर बुधवार को अहम सुनवाई हुई।
चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने राज्य सरकार की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताते हुए स्पष्ट कहा कि चार साल से अधिक समय तक इन महत्वपूर्ण संस्थाओं को निष्क्रिय रखना गंभीर मामला है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि लोकायुक्त जैसे संस्थान भ्रष्टाचार पर निगरानी रखने के लिए बनाए जाते हैं, लेकिन लंबे समय से पद खाली रहने के कारण इनकी भूमिका पूरी तरह प्रभावित हो रही है।
कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि जल्द से जल्द सभी रिक्त पदों को भरते हुए इन संस्थाओं को सक्रिय किया जाए, अन्यथा अदालत कड़े आदेश पारित करने के लिए स्वतंत्र होगी।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि लोकायुक्त सहित अन्य पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया जारी है और जल्द ही इसे पूरा कर लिया जाएगा। हालांकि, इस पर कोर्ट संतुष्ट नहीं दिखा।
वहीं, याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अभय कुमार मिश्रा ने अदालत को बताया कि सरकार बार-बार “प्रक्रिया जारी है” का हवाला देती रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस परिणाम नहीं दिख रहा।उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार को छह सप्ताह के भीतर लोकायुक्त की नियुक्ति करने का स्पष्ट निर्देश दिया था, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई नियुक्ति नहीं की गई।
सरकार ने एक बार फिर समय की मांग की, जिस पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए संकेत दिया कि अब और देरी स्वीकार्य नहीं होगी।


