दिल्ली के कई क्षेत्रों में सीवर ओवरफ्लो की समस्या बनी हुई है। इसका मुख्य कारण नालों और सीवर लाइनों की नियमित सफाई में लापरवाही है। अगस्त 2023 में दिल्ली के कई क्षेत्रों में आई बाढ़ के कारण गठित जांच समिति ने भी सीवर की सफाई न होने पर गहरी चिंता जताई थी।
सीवर ओवरफ्लो की समस्या क्यों है?
ट्रंक लाइन (मुख्य सीवर लाइन) और पेरिफेरल लाइन की कभी सफाई नहीं की गई थी। दो वर्ष पहले मुख्य सीवर लाइन की सफाई का कार्य शुरू किया गया था, लेकिन इसकी गति बहुत धीमी है। दिल्ली में लगभग 205 किलोमीटर लंबी मुख्य सीवर लाइन (1000 मिमी से अधिक व्यास वाली) और 529.5 किलोमीटर लंबी पेरिफेरल सीवर लाइन (1000 मिमी से कम व्यास वाली) की कभी सफाई नहीं की गई थी।
वर्ष 2023 में शुरू हुआ था गाद निकालने का काम
यमुना की सफाई के लिए एनजीटी द्वारा गठित उच्च स्तरीय यमुना समिति के हस्तक्षेप के बाद वर्ष 2023 में गाद निकालने का काम शुरू हुआ था। दिसंबर 2024 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य था, लेकिन अभी तक मात्र 50 प्रतिशत मुख्य सीवर लाइन की सफाई ही हो पाई है। सफाई न होने से सीवर लाइन के अधिकांश हिस्सों में गाद जमा है। वर्ष 2024 में संसद में भी यह मुद्दा उठाया गया था।
दिल्ली जल बोर्ड का दावा है कि शेष लगभग 100 किलोमीटर मुख्य सीवर लाइन की सफाई के लिए 29 सुपर सकर मशीनें लगाई गई हैं। कहने को तो 10 हजार किलोमीटर से अधिक लंबी आंतरिक सीवर लाइन की हर वर्ष सफाई होती है, लेकिन जमीन पर स्थिति अलग है। दिल्ली के कई क्षेत्रों से सीवर ओवरफ्लो की शिकायतें लगातार आती रहती हैं।
दिल्ली जल बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि आधुनिक मशीनों से सीवर लाइन की सफाई हो रही है। मुख्य लाइन के साथ-साथ गलियों में आंतरिक लाइनों की सफाई पर भी ध्यान दिया जा रहा है। सीवर लाइन ढकी होने के कारण सफाई में समय लगता है।


