मासूम बच्चों के भविष्य को लेकर बड़े-बड़े वादे करना अब महंगा पड़ सकता है। बच्चों के तेज विकास का सपना दिखाने वाली कंपनी राइ¨जग सुपरस्टार्स इंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड पर केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने आठ लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
कंपनी अपने कार्यक्रम के जरिए दावा करती थी कि उसके माध्यम से बच्चे तीन महीने में रेंगना, आठ महीने में चलना और 18 महीने में दो सौ से अधिक शब्द बोलना सीख सकते हैं। जांच में पाया गया कि इन दावों के समर्थन में कंपनी के पास कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
अभिभावकों को गुमराह करने वाले दावे
सीसीपीए ने माना कि इस तरह के दावे अभिभावकों को गुमराह करने वाले हैं। कंपनी अपने “प्रतिभा संवर्धन कार्यक्रम” के जरिए विकास संबंधी उपलब्धियों को इस प्रकार प्रस्तुत कर रही थी, मानो कार्यक्रम में शामिल होते ही बच्चों का विकास तय समय सीमा में असामान्य रूप से तेज हो जाएगा।
शिकायत मिलने के बाद जब मामले की जांच की गई तो पाया गया कि वेबसाइट पर इन दावों को प्रमुखता से दिखाया गया था, जिससे अभिभावकों के मन में निश्चित परिणाम की धारणा बन सकती थी। जांच के दौरान यह भी स्पष्ट हुआ कि कंपनी के पास दावों को साबित करने के लिए वैज्ञानिक अध्ययन, चिकित्सकीय आकलन, व्यवस्थित निगरानी व्यवस्था या प्रमाणित आंकड़े नहीं थे।
कंपनी ने अपने बचाव में कुछ अभिभावकों के अनुभवों और प्रशंसात्मक टिप्पणियों का हवाला दिया। लेकिन प्राधिकरण ने कहा कि चु¨नदा अनुभवों को सामान्य और सुनिश्चित परिणाम के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।
सीसीपीए का आदेश
इन टिप्पणियों का न तो स्वतंत्र सत्यापन था और न ही यह बताया गया था कि कितने बच्चों पर कार्यक्रम आजमाया गया और परिणाम कैसे मापे गए। सीसीपीए ने आदेश में कहा कि शिशु का विकास संवेदनशील विषय है। हर बच्चे की शारीरिक और मानसिक वृद्धि की गति अलग होती है।


