वर्ष 2027 के विधान सभा चुनाव में भाजपा का मुकाबला उसके ही तरीके से करने की बात कह चुके सपा के राष्ट्रीय अखिलेश यादव अब पार्टी की चुनावी तैयारी को उसी तर्ज पर आगे बढ़ा रहे हैं। इस बार टिकट बंटवारे में पार्टी के अंदरूनी फीडबैक के साथ बाहरी एजेंसियों से सर्वे कराकर प्रत्याशियों का चयन किया जाएगा, जिससे स्थानीय समीकरण और जमीनी हकीकत की अनदेखी न हो।
सपा प्रमुख ने पार्टी के अंदर साफ कर दिया है कि सिफारिश पर किसी को टिकट नहीं दिया जाएगा, फिर चाहे वो सिफारिश बड़े नेताओं ने की हो। प्रत्याशी चयन में जिताऊ होने के पैमाने पर कोई समझौता नहीं होगा। सर्वे का काम होली के पर्व के बाद शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।
वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों के बाद राजनीति में उम्मीदवारों के सर्वे और डाटा आधारित चयन की चर्चाएं होती रही हैं। भाजपा की सफलता के पीछे उनके बूथ स्तर तक चुनाव प्रबंधन के साथ सर्वे और फीडबैक के आधार पर टिकट वितरण को एक बड़ी वजह माना जाता है।
अब सपा भी बूथ स्तर तक प्रबंधन को पुख्ता करने के साथ डाटा, फीडबैक और सर्वे की सहायता लेने जा रही है। वर्ष 2012 में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने वाली सपा को वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त मिली थी।
इसके बाद वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में प्रदर्शन बेहतर हुआ था, परंतु सत्ता हासिल नहीं हो पाई थी। उस दौरान कुछ सीटों पर टिकट वितरण को लेकर असंतोष रहा था। हालांकि सपा ने उस चुनाव में भी सर्वे की सहायता ली थी, परंतु इसे व्यापक स्तर पर नहीं अपनाया गया था। इस बार सपा कई बाहरी एजेंसियों का सहयोग लेने पर विचार कर रही है।
संभावित जिताऊ दावेदारों की सूची होगी तैयार
पार्टी सूत्रों के अनुसार होली के बाद सर्वे के माध्यम से प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में संभावित जिताऊ दावेदारों की सूची तैयार कराई जाएगी। स्थानीय लोकप्रियता, जातीय समीकरण, संगठन पर पकड़, वित्तीय क्षमता, इंटरनेट मीडिया पर उपस्थिति और बूथ प्रबंधन जैसे बिंदुओं पर दावेदारी को परखा जाएगा।


