सेहत के प्रति सचेत लोगों ने होली में हर्बल रंगों का इस्तेमाल शुरू कर दिया पर अभी भी बड़ी संख्या में लोग केमिकल रंगों का इस्तेमाल कर रहे हैं। मानव जीवन पर्यावरण के लिए घातक इन रंगों का हर्बल रंगों के मुकाबले कारोबार करीब डेढ़ हजार किलोग्राम से अधिक है।
हानिकारक होने के बाद भी प्रशासन इसकी बिक्री पर लगाम नहीं लग पा रही है। केमिकलयुक्त रंगों से त्वचा समेत विभिन्न प्रकार की बीमारियों का जन्म हो जाता है। कभी आंख या कान में गया तो बड़ी समस्या खड़ी हो जाती है।
होली की हुडदंग ज्यादातर लोगों को पसंद आती है। इस दिन होली में रंग न बरसे ऐसा संभव नहीं है। हर ओर रंग अबीर गुलाल नजर आता है। होली में बिना रंगों की होली की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। रंगों में जब केमिकलयुक्त रंगों की बात आती है ताे हर कोई रंग अबीर गुलाल से बचना चाहता है।
दरअसल यह केमिकलयुक्त रंग इतने खतरनाक होते हैं कि यदि किसी आंखों में लग जाए तो रोशनी को छीन सकते हैं। किसी के चेहरे को बदसूरत भी बना सकता है। इसलिए हो सके तो होली पर केमिकल रहित रंगों का प्रयोग करना चाहिये।


