सिंगरौली।एनटीपीसी विंध्याचल से निकलने वाले राखड़ (फ्लाई ऐश) के भंडारण और परिवहन को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। आरोप है कि विंध्यनगर बस डिपो के पीछे एक निजी कंपनी ‘ऐशटेक’ द्वारा बड़े पैमाने पर राखड़ का अस्थायी भंडारण किया जा रहा है, जो पर्यावरणीय नियमों और नियामक प्रावधानों के विरुद्ध है।यह मामला अब केवल पर्यावरणीय चिंता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें नियामक संस्थाओं, रेलवे अनुमति और संभावित प्रशासनिक मिलीभगत जैसे गंभीर प्रश्न भी जुड़ गए हैं।

रिहायशी व सार्वजनिक क्षेत्र के पास भंडारण
विंध्यनगर बस डिपो के पीछे स्थित स्थल पर खुले में राखड़ का ढेर लगाए जाने की बात सामने आई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हवा चलने पर राखड़ उड़कर आसपास के क्षेत्र में फैलता है, जिससे वायु गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, फ्लाई ऐश का भंडारण निर्धारित मानकों के तहत, ढके हुए और वैज्ञानिक तरीके से विकसित स्थलों पर ही किया जाना चाहिए। खुले में भंडारण से धूल प्रदूषण, मिट्टी और जल स्रोतों के दूषित होने का खतरा बढ़ जाता है।
एनजीटी और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमों की अनदेखी?
पर्यावरण से जुड़े मामलों में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) द्वारा समय-समय पर फ्लाई ऐश प्रबंधन को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा भी राखड़ के भंडारण, परिवहन और उपयोग को लेकर स्पष्ट शर्तें निर्धारित हैं। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि जिस स्थल पर राखड़ रखा जा रहा है, वह न तो अधिकृत ऐश डाइक क्षेत्र है और न ही उसके लिए पर्यावरणीय स्वीकृति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या संबंधित कंपनी के पास ‘कंसेंट टू एस्टैब्लिश’ और ‘कंसेंट टू ऑपरेट’ जैसी वैध स्वीकृतियां हैं?

रेलवे वैगनों में लोडिंग, NOC पर भी संशय
सूत्रों के अनुसार, उक्त भंडारित राखड़ को रेलवे वैगनों में लोड कर अन्यत्र भेजा जा रहा है। लेकिन यह आरोप भी सामने आया है कि संबंधित कंपनी के पास रेलवे की ओर से आवश्यक एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) उपलब्ध नहीं है। यदि यह सही है, तो बिना विधिवत अनुमति रेलवे परिसर या वैगन का उपयोग करना गंभीर प्रशासनिक और कानूनी प्रश्न खड़ा करता है। रेलवे नियमों के तहत किसी भी औद्योगिक सामग्री की ढुलाई के लिए निर्धारित अनुबंध और स्वीकृतियां आवश्यक होती हैं।
मिलीभगत के आरोप?
मामले को और गंभीर बनाते हुए कुछ सूत्रों का दावा है कि इस पूरे प्रकरण में एनटीपीसी विंध्याचल के कुछ अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है। आरोप है कि निजी कंपनी के साथ कथित साठगांठ कर नियमों की अनदेखी की जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यदि जांच में ऐसी कोई तथ्यात्मक स्थिति सामने आती है, तो यह एक बड़े गोल-माल का रूप ले सकता है।
पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर संभावित असर
फ्लाई ऐश में सूक्ष्म कण होते हैं, जो हवा में मिलकर श्वसन तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अनियंत्रित भंडारण से:
- वायु प्रदूषण बढ़ सकता है
- आसपास की कृषि भूमि प्रभावित हो सकती है
- जल स्रोतों में राख मिश्रण की आशंका रहती है
- स्थानीय निवासियों में श्वसन रोगों का खतरा बढ़ सकता है
ऐसे में नियामक संस्थाओं की सक्रियता अत्यंत आवश्यक मानी जा रही है।
जांच और कार्रवाई की मांग
स्थानीय सामाजिक लोगों ने मांग की है कि:
- पूरे मामले की स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
- संबंधित कंपनी की वैध स्वीकृतियों और अनुबंधों की सार्वजनिक जांच हो।
- रेलवे से एनओसी संबंधी स्थिति स्पष्ट की जाए।
- यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाए तो जिम्मेदार अधिकारियों और कंपनी पर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार
अब निगाहें एनटीपीसी विंध्याचल प्रबंधन, मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला प्रशासन पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या इस मामले में औपचारिक जांच बैठाई जाती है या आरोपों को खारिज किया जाता है। फिलहाल, विंध्यनगर में राखड़ भंडारण का यह मामला पर्यावरणीय सुरक्षा, नियामकीय पारदर्शिता और सार्वजनिक जवाबदेही से जुड़ा बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।


