न कोई जमीन न जायदाद, बेरोजगार युवक के हाथ फिर कैसे लगी फेरारी?

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फेरारी कंपनी की कार काफी महंगी होती है। इस कार कंपनी की गाड़ी को खरीदना किसी आम आदमी के लिए खरीदना काफी मुश्किल होता है, वहीं किसी बेरोजगार के लिए, जिसके पास जमीन और जायदाद भी न हो, उसके लिए इस फेरारी खरीदना काफी बड़ी बात है।

बेरोजगार के हाथ कैसे लगी फेरारी?

फ्रांस से ऐसे ही एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है। यहां ट्रैफिक पुलिस ने एक चमकीली लाल फेरारी पोटोफिनो को 250 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से चलाते हुए रोका।

फ्रांस की ट्रैफिक पुलिस ने जब फेरारी चला रहे शख्स के बारे में छानबीन की, तब सरकारी रिकॉर्ड में वह बेघर और बेरोजगार निकलेगा। पूछताछ में युवक ने बताया कि वह और उसका परिवार फ्रांसीसी परिवार भत्ता कोष पर निर्भर है।

पुलिस ने लिया एक्शन

युवक ने फेरारी को अपनी मां की कार बताया, लेकिन रिकॉर्ड से पता चला कि यह कार एक रियल एस्टेट कंपनी के नाम पर रजिस्टर थी। युवक और उसका परिवार शौक-मौज की जिंदगी जीते थे, लेकिन कागजों पर इन्होंने खुद को बेरोजगार और दिवालिया घोषित किया हुआ था।

पुलिस के मुताबिक, युवक और उसके परिवार ने कुल मिलाकर सामाजिक लाभों में कम से कम 21 लाख डॉलर का गबन किया। भारतीय मुद्रा में ये राशि 19 करोड़ रुपये के करीब है।

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