पाकिस्तान की लाहौर की छतों, पार्कों और सड़कों पर रंग-बिरंगी पतंगें आसमान में उड़ रही हैं। यह तीन दिवसीय उत्सव पंजाब प्रांत में बसंत यानी वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है। लोग इतने उत्साहित हैं कि पतंगें और डोरें बाजारों से लगभग खत्म हो गई हैं।
यह त्योहार सदियों पुराना है, लेकिन 2007 में पंजाब सरकार ने इसे पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया था। इसकी वजह ग्लास पाउडर लगी तेज धार वाली डोरें (मांझा) और हवाई फायरिंग से होने वाली मौतें और गंभीर चोटें थी। इन डोरों ने कई पैदल चलने वालों और मोटरसाइकिल सवारों की जान ली थी, गले कटने से लेकर गंभीर जख्म तक के मामले सामने आए थे। सरकार ने सुरक्षा के नाम पर सख्त कदम उठाया और बसंत पर पूरी रोक लगा दी।
सुरक्षा के सख्त इंतजाम के साथ छूट
लेकिन साल 2026 में पाकिस्तान सरकार ने 19 साल बाद राहत दी। बसंत को सिर्फ तीन दिनों के लिए इजाजत मिली, वो भी बहुत सख्त सुरक्षा नियमों के साथ। लाहौर में हजारों लोग दूर-दूर से आए हैं। यह फैसला लोगों ने खुले दिल से स्वागत किया है।
कई अधिकार कार्यकर्ताओं और सांस्कृतिक लोगों का कहना था कि त्योहार में नहीं, बल्कि पहले की ढीली कानून-व्यवस्था में कमी थी, जिससे हादसे हुए। अब नियमों का पालन करवाया जा रहा है।


