विकासखंड चोलापुर के ग्राम पंचायत जगदीशपुर स्थित हिंदी एवं अंग्रेजी माध्यम प्राथमिक विद्यालय में एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने मानवता और शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार कर दिया है। विद्यालय में सफाई कर्मियों की अनुपस्थिति के कारण शिक्षकों ने छोटे-छोटे बच्चों से विद्यालय परिसर और कक्षाओं की सफाई कराई।
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें देखा जा सकता है कि लगभग एक दर्जन बच्चे हाथों में किताबों की जगह झाड़ू लिए कक्षाओं और विद्यालय परिसर की सफाई कर रहे हैं। कुछ बच्चे कूड़ेदान में कचरा डालते और कुछ जमीन पर झाड़ू लगाते नजर आ रहे हैं।
इस दृश्य ने ग्रामीणों और अभिभावकों में आक्रोश पैदा कर दिया है। जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत जगदीशपुर में तीन सफाई कर्मी तैनात हैं, लेकिन वे कई दिनों से विद्यालय नहीं पहुंचे हैं। इस स्थिति के कारण विद्यालय की स्वच्छता व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है, जिससे बच्चों को मजबूरी में सफाई कार्य करना पड़ा। गांव के एक युवक ने इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाकर इंटरनेट मीडिया पर वायरल कर दिया, जिससे यह मामला और भी चर्चा का विषय बन गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार जहां एक ओर बच्चों को बेहतर शिक्षा, सम्मानजनक वातावरण और बाल अधिकारों की सुरक्षा की बात करती है, वहीं दूसरी ओर इस तरह की घटनाएं सरकारी दावों की पोल खोलती नजर आ रही हैं। इस घटना ने शिक्षा व्यवस्था की वास्तविकता को उजागर किया है, जहां बच्चों को अपने अधिकारों से वंचित किया जा रहा है।
खंड शिक्षा अधिकारी नागेंद्र सरोज ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शिक्षकों द्वारा छात्रों से सफाई कराना नियम के विरुद्ध है। उन्होंने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेज दी है। यह कदम इस बात का संकेत है कि शिक्षा विभाग इस मामले को लेकर गंभीर है और उचित कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने न केवल शिक्षा व्यवस्था की खामियों को उजागर किया है, बल्कि यह भी दर्शाया है कि बच्चों को उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। ग्रामीणों का मानना है कि इस प्रकार की घटनाएं बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं।
इस मामले ने यह भी स्पष्ट किया है कि सरकारी स्कूलों में स्वच्छता व्यवस्था को बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है। यदि सफाई कर्मी समय पर अपनी ड्यूटी पर नहीं पहुंचते हैं, तो इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य पर पड़ता है। इस घटना के बाद अब यह देखना होगा कि शिक्षा विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। शिक्षा का अधिकार हर बच्चे का है, और इसे सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।


