दिल्ली में बढ़ेगी महिला छात्रावासों की संख्या, छात्राओं और कामकाजी महिलाओं को मिलेगी बड़ी राहत
केंद्रीय बजट ने उन महिलाओं के लिए नई उम्मीद जगाई है जो दिल्ली में पढ़ाई करने या करियर बनाने का सपना देखती हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा दिल्ली के हर जिले में कामकाजी महिलाओं और छात्राओं के लिए नए हॉस्टल बनाने की घोषणा एक क्रांतिकारी कदम है।
महिलाओं और छात्राओं के अनुसार, इस घोषणा से न सिर्फ छात्राओं को सुरक्षित रहने की जगह मिलेगी, बल्कि उनके परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ भी कम होगा, जिनकी बेटियां काम और पढ़ाई के लिए दूर-दराज के इलाकों से दिल्ली आती हैं।
प्राइवेट पीजी की मनमानी और असुरक्षा से मुक्ति
मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के NDMC इलाके में लगभग 40 से 50 हॉस्टल चल रहे हैं। हालांकि, दूसरे राज्यों से आने वाली छात्राओं की संख्या के मुकाबले इन हॉस्टलों में कमरों की संख्या बहुत कम है। दूसरा, सरकारी हॉस्टलों में सीटों की सीमित संख्या के कारण छात्राओं को प्राइवेट पीजी या फ्लैट का सहारा लेना पड़ता है, जहां सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं होते और साफ-सफाई और खाने की क्वालिटी भी अक्सर भरोसेमंद नहीं होती।
इसके अलावा, बिजली और पानी के लिए वसूला जाने वाला भारी किराया मध्यम वर्गीय परिवारों की कमर तोड़ देता है। कई बार आर्थिक दिक्कतों और असुरक्षित माहौल के कारण होनहार छात्राओं को बीच में ही पढ़ाई छोड़कर घर लौटना पड़ता है।
करियर का रास्ता आसान होगा और मानसिक तनाव कम होगा
दूसरे राज्यों से आई कामकाजी महिलाओं के अनुसार, दिल्ली में सुरक्षित रहने की जगह ढूंढना किसी चुनौती से कम नहीं है। लंबे ऑफिस घंटों और नाइट शिफ्ट के बाद खाना बनाना, साफ-सफाई और बेसिक सुविधाओं (जैसे साफ पीने का पानी और हवादार जगह) की कमी उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों पर असर डालती है।
सुरक्षित विकल्पों की कमी के कारण महिलाओं को अक्सर असुरक्षित इलाकों में रहने के लिए मजबूर होना पड़ता है। सरकार की इस पहल से अब कामकाजी महिलाओं को इन रोज़मर्रा की समस्याओं से राहत मिलेगी और वे अपने करियर पर बेहतर तरीके से ध्यान दे पाएंगी।


