हरियाणा सरकार ने हाई टेंशन बिजली तारों और टावरों पर मुआवजा नीति में किया संशोधन
हरियाणा सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए हाई टेंशन बिजली तारों और टावरों से जुड़ी मुआवजा नीति में संशोधन किया है। नई व्यवस्था के तहत अब केवल 66 किलोवाट से अधिक क्षमता वाले बिजली तारों और टावरों के लिए ही मुआवजा दिया जाएगा।
संशोधित नीति के अनुसार, राइट ऑफ वे (Right of Way) कॉरिडोर के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में भूमि मूल्य का प्रतिशत तय किया गया है। गांवों में भूमि मूल्य का 30 प्रतिशत, नगर पालिकाओं में 45 प्रतिशत और नगर निगम क्षेत्रों में 60 प्रतिशत मुआवजा किसानों को मिलेगा।
यदि किसी खेत में बिजली का टावर लगाया जाता है, तो भूमि के सर्किल रेट से दोगुना मुआवजा दिया जाएगा। यह कदम किसानों को उनकी जमीन के उपयोग और संरचनाओं पर पड़ने वाले प्रभाव के लिए उचित प्रतिपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
प्रदेश सरकार ने जुलाई 2024 में जारी मुआवजा नीति में यह संशोधन किया है। ऊर्जा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्यामल मिश्रा द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि हाई टेंशन बिजली तारों और टावरों से फसलों को होने वाले नुकसान का सत्यापन पटवारी या राजस्व विभाग के अन्य अधिकारी करेंगे।
इस संशोधित नीति से किसानों को उम्मीद है कि उन्हें जमीन और फसल के नुकसान का उचित मूल्य मिलेगा। वहीं, सरकार का कहना है कि यह कदम बिजली परियोजनाओं के सुचारु संचालन और किसानों के हितों की रक्षा दोनों को संतुलित करेगा।


