अमेरिका में प्रवासियों को वर्षों से यह सलाह दी जाती रही है कि यदि इमिग्रेशन अधिकारी दरवाजा खटखटाएं तो बिना जज के हस्ताक्षर वाले वारंट के दरवाजा न खोलें। लेकिन अब यह स्थिति बदल सकती है।
एक आंतरिक सरकारी मेमो के अनुसार, अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंसी ICE (Immigration and Customs Enforcement) को बिना जज के वारंट के भी लोगों के घरों में जबरन प्रवेश की अनुमति दी जा सकती है। इस संभावित बदलाव ने अप्रवासी समुदायों में भय और असुरक्षा की भावना को बढ़ा दिया है।
प्रवासियों की प्रतिक्रिया मैक्सिको से तीन दशक पहले अमेरिका आए फर्नांडो पेरेज बताते हैं कि इमिग्रेशन अधिकारी कई बार उनके घर पहुंचे, लेकिन उन्होंने दरवाजा नहीं खोला क्योंकि उन्हें कानून की जानकारी थी। उनका कहना है कि अब यदि नया नियम लागू होता है तो अधिकारी सीधे घर में घुस सकते हैं, जिससे प्रवासियों की स्थिति और कठिन हो जाएगी।
अब तक का कानूनी प्रावधान सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट नियम रहा है कि बिना जज के हस्ताक्षर वाले वारंट के सरकार किसी भी व्यक्ति के घर में जबरन प्रवेश नहीं कर सकती। इसी कारण ICE अधिकारी अक्सर लोगों को घर के बाहर, सड़क या सार्वजनिक स्थानों पर गिरफ्तार करते थे। कई बार उन्हें घंटों तक घर के बाहर इंतजार करना पड़ता था और यदि व्यक्ति बाहर नहीं निकलता, तो वे लौट जाते थे।
संभावित असर यदि यह नया नियम लागू होता है तो प्रवासी समुदायों के लिए यह गंभीर चुनौती साबित हो सकती है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम संविधानिक अधिकारों और गोपनीयता पर सवाल खड़े करेगा। वहीं, प्रवासी अधिकार समूह इसे मानवाधिकारों के उल्लंघन के रूप में देख रहे हैं।


