अबू सलेम को पैरोल देने का महाराष्ट्र सरकार ने किया विरोध, फरारी से भारत-पुर्तगाल संबंधों पर संकट की आशंका

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1993 मुंबई सिलसिलेवार बम धमाकों के दोषी अबू सलेम को पैरोल दिए जाने के मुद्दे पर महाराष्ट्र सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। सरकार ने बंबई हाईकोर्ट को बताया कि सलेम की रिहाई से उसके दोबारा फरार होने की आशंका है, जिससे भारत और पुर्तगाल के बीच संबंधों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

न्यायमूर्ति ए.एस. गडकरी और श्याम चंदक की पीठ के समक्ष दायर हलफनामे में सरकार ने सलेम को एक अंतरराष्ट्रीय गैंगस्टर बताते हुए कहा कि अधिकतम दो दिन की आपातकालीन पैरोल पर ही विचार किया जा सकता है।

जेल महानिरीक्षक सुहास वारके ने अदालत को बताया कि सलेम 1993 की तरह दोबारा फरार हो सकता है, जो समाज की सुरक्षा और दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों के लिए गंभीर खतरा होगा।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि सलेम को वर्ष 2005 में पुर्तगाल से प्रत्यर्पण संधि के तहत भारत लाया गया था। उस समय भारत ने पुर्तगाल को कुछ आश्वासन दिए थे, जिनका पालन करना भारत की जिम्मेदारी है। यदि सलेम फरार हुआ तो यह एक गंभीर कूटनीतिक संकट पैदा कर सकता है।

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