हिंदू युवक संग रहने की जिद पर अड़ी मुस्लिम युवती, कोर्ट ने दिए बयान दर्ज कर साथ जाने की अनुमति
नहटौर थाना क्षेत्र के एक गांव की मुस्लिम युवती मंगलवार दोपहर अचानक थाने पहुंची। उसने पुलिस अधिकारियों के सामने स्वयं को बालिग बताते हुए गांव के ही एक हिंदू युवक के साथ रहने की इच्छा जताई। युवती ने स्पष्ट कहा कि वह 20 वर्ष की है और युवक से प्रेम करती है। साथ ही उसने शादी कर उसी के साथ जीवन बिताने का निर्णय लिया है।
पुलिस ने प्रारंभिक स्तर पर युवती को समझाने का प्रयास किया। अधिकारियों ने उसे अपने परिजनों को बुलाने और घर लौटने की सलाह दी। लेकिन युवती अपने फैसले पर अडिग रही और किसी भी तरह घर जाने को तैयार नहीं हुई। इस दौरान युवक उसके साथ मौजूद नहीं था। युवती अकेले ही थाने पहुंची थी और वहीं उसने अपने इरादे स्पष्ट किए।
परिजनों को बुलाकर भी पुलिस ने काफी देर तक समझाने का प्रयास किया। परिजन भी उसे घर ले जाने की कोशिश करते रहे, लेकिन युवती ने साफ कहा कि वह हिंदू युवक के साथ ही रहना चाहती है। लगातार समझाने के बावजूद जब युवती अपने निर्णय से पीछे नहीं हटी, तो पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया अपनाई।
थाना प्रभारी ने बताया कि युवती को मेडिकल परीक्षण के लिए भेजा गया। इसके बाद न्यायालय में उसके बयान दर्ज कराए गए। कोर्ट ने युवती की उम्र और उसके बयान को ध्यान में रखते हुए उसे युवक के साथ जाने की अनुमति प्रदान कर दी।
यह पूरा घटनाक्रम मंगलवार दोपहर लगभग तीन बजे का है। युवती ने पुलिस के सामने अपने प्रेम संबंध और शादी की इच्छा को लेकर दृढ़ता दिखाई। उसने कहा कि वह बालिग है और अपनी मर्जी से जीवनसाथी चुनने का अधिकार रखती है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, युवती ने बार-बार यही दोहराया कि वह हिंदू युवक के साथ ही रहना चाहती है। परिजनों और पुलिस की समझाइश का उस पर कोई असर नहीं हुआ। अंततः न्यायालय में बयान दर्ज कराए जाने के बाद उसे युवक के साथ जाने की अनुमति मिल गई।
थाना प्रभारी धीरज नागर ने पुष्टि की कि युवती अकेले थाने आई थी और उसने स्वयं अपनी इच्छा जाहिर की थी। इस मामले में पुलिस ने कानूनन आवश्यक कदम उठाते हुए मेडिकल परीक्षण और न्यायालयीन प्रक्रिया पूरी कराई।
यह घटना सामाजिक दृष्टि से भी चर्चा का विषय बन गई है। एक ओर युवती का अपने निर्णय पर अडिग रहना उसकी स्वतंत्र सोच को दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर परिवार और समाज की परंपरागत मान्यताओं से टकराव भी सामने आया।
कानून के अनुसार, बालिग व्यक्ति को अपनी इच्छा से जीवनसाथी चुनने का अधिकार है। इस मामले में भी न्यायालय ने युवती की इच्छा को मान्यता दी और उसे स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने की अनुमति प्रदान की।


