माघ मेला के सबसे बड़े स्नान पर्व मौनी अमावस्या पर रविवार को पावन संगम में श्रद्धालुओं की अपार आस्था उमड़ पड़ी। सुबह छह बजे से दस बजे तक तीन बार संगम के सभी स्नान घाट ओवर क्राउडेड हो गए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को बार-बार इमरजेंसी प्लान लागू करना पड़ा। सुबह 10 बजे तक कुल छह इमरजेंसी प्लान लागू किए गए।
श्रद्धालुओं का रेला
- पौष पूर्णिमा (3 जनवरी) पर लगभग 31 लाख श्रद्धालु स्नान के लिए पहुंचे थे।
- मकर संक्रांति (15 जनवरी) पर श्रद्धालुओं की संख्या बढ़कर एक करोड़ 85 लाख तक पहुंच गई थी।
- इन दोनों पर्वों पर भारी भीड़ उमड़ी थी, लेकिन तब प्रशासन को इमरजेंसी प्लान लागू नहीं करना पड़ा था।
मौनी अमावस्या की विशेषता
मौनी अमावस्या को माघ मेला का सबसे बड़ा स्नान पर्व माना जाता है। इस दिन संगम में स्नान का विशेष महत्व है और श्रद्धालु दूर-दूर से आकर पुण्य की डुबकी लगाते हैं।
निष्कर्ष
मौनी अमावस्या पर उमड़ी भीड़ ने प्रशासन की परीक्षा ले ली। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन को बार-बार इमरजेंसी प्लान लागू करना पड़ा। यह दर्शाता है कि आस्था के इस पर्व पर संगम में श्रद्धालुओं का उत्साह और भीड़ कितनी विशाल होती है।


