गोरखपुर महोत्सव के अंतिम दिन चंपा देवी परिसर में आयोजित सरस मेला और हस्तशिल्प बाजार में खरीदारों की भारी भीड़ देखने को मिली। भदोही और मिर्जापुर से आए कालीन, फर्नीचर, वस्त्र, अचार और घरेलू उपयोग की वस्तुओं की खरीदारी के लिए लोग उत्साह से पहुंचे। बिक्री को बढ़ावा देने के लिए दुकानदारों ने 30 से 40 प्रतिशत तक की छूट दी, जिससे देर शाम तक व्यापार चलता रहा।
गोरखपुर महोत्सव की शुरुआत 11 जनवरी को शुरू हुए इस महोत्सव के तहत शिल्प एवं सरस मेला में विभिन्न प्रकार के स्टाल लगाए गए थे। इनमें टेराकोटा की कलाकृतियां, काला नमक चावल से बने खाद्य पदार्थ, हाथ से बने अचार, बिस्कुट, नमकीन और चिप्स, सागौन की लकड़ी से बने फर्नीचर, सजावटी सामान, ऊनी एवं रेडीमेड वस्त्र और खादी वस्त्र भंडार के कपड़े शामिल रहे।
यह आयोजन न केवल स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों के लिए अवसर लेकर आया, बल्कि खरीदारों को भी परंपरागत और आधुनिक उत्पादों का अनोखा संगम देखने को मिला।


