कलकत्ता हाई कोर्ट ने सहकारी बैंक कर्मचारियों की चुनावी ड्यूटी रद्द की
कलकत्ता हाई कोर्ट ने सहकारी बैंक के कर्मचारियों को चुनावी ड्यूटी पर लगाने के निर्वाचन आयोग के आदेश को रद्द कर दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि स्वायत्त सहकारी बैंक के कर्मचारी सरकारी कर्मचारी नहीं माने जाते, इसलिए उन्हें किसी भी चुनाव कार्य के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
फैसले में हाई कोर्ट ने कहा कि निर्वाचन आयोग केवल उन्हीं कर्मचारियों की सेवाओं का उपयोग कर सकता है, जिन पर राष्ट्रपति या राज्यपाल का नियंत्रण या अनुशासनात्मक अधिकार हो। इस आदेश को न्यायमूर्ति कृष्णा राव ने पारित किया।
यह मामला पश्चिम बालागेरिया सेंट्रल को-आपरेटिव बैंक लिमिटेड के कर्मचारियों द्वारा दायर याचिका से जुड़ा था। कर्मचारियों ने उच्च न्यायालय में तर्क दिया कि उन्हें चुनावी ड्यूटी पर लगाना उनके अधिकारों का उल्लंघन है।
हाई कोर्ट ने इस याचिका पर फैसला देते हुए कहा कि सहकारी बैंक के कर्मचारी स्वायत्त संस्थाओं के सदस्य हैं और उनके कामकाज पर सरकार का सीधे नियंत्रण नहीं है। इसलिए निर्वाचन आयोग उन्हें चुनावी कार्यों के लिए बाध्य नहीं कर सकता।
इस फैसले से स्वायत्त सहकारी बैंक कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है और यह चुनावी प्रक्रिया में कर्मचारियों के अधिकारों और स्वतंत्रता की रक्षा का उदाहरण माना जा रहा है।


