दलित वोटरों की दरकार, तीसरे डिप्टी सीएम का इंतजार

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उत्तरप्रदेश में तीसरा डिप्टी सीएम बनाने की अटकलें भाजपा की 2027 में विधानसभा चुनाव की रणनीति का अभिन्न हिस्सा बन चुकी हैं। योगी आदित्यनाथ सरकार में वर्तमान में दो उपमुख्यमंत्री हैं- केशव प्रसाद मौर्य जो ओबीसी समुदाय से आते हैं और ब्रजेश पाठक जो ब्राह्मण पृष्ठभूमि से आते हैं। कैबिनेट विस्तार की सुगबुगाहट के बीच तीसरे डिप्टी सीएम की चर्चा तेज हो गई है, जो मुख्य रूप से सामाजिक समीकरणों को संतुलित करने और दलित-वंचित वर्गों को मजबूत करने की दिशा में इशारा करती है।

दिसंबर 2025 में खरमास समाप्ति के बाद विस्तार की उम्मीदें बढ़ीं, लेकिन जनवरी 2026 तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई। भाजपा ने 2022 के विधानसभा चुनावों में हिंदुत्व और विकास के एजेंडे पर जीत दर्ज की थी, लेकिन अभी हुए उपचुनावों और लोकसभा परिणामों ने ओबीसी, दलित तथा एससी समुदायों में असंतोष देखने को भी मिला। इसी को देखते हुए तीसरा डिप्टी सीएम एससी समुदाय से लाने की कवायद चल रही है, ताकि जाटव और दलित वोट बैंक को मजबूत किया जा सके। नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज सिंह की नियुक्ति ने इन अफवाहों को और बल दिया है। यह कदम केंद्र की मोदी सरकार के सामाजिक न्याय एजेंडे से भी पूरी तरह मेल खाता है, खासकर जब वैश्विक परिदृश्य में राजनीतिक बदलाव भारत को प्रभावित कर रहे हैं। विपक्षी दल जैसे समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी इसे भाजपा की जातिगत सियासत का हिस्सा बता रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, साध्वी निरंजन ज्योति जैसी नेत्रियां इस पद की प्रबल दावेदार हैं। पंकज सिंह या राजनाथ सिंह के करीबी विधायकों के नाम भी चर्चा में हैं। केबिनेट के 60 में से 6 पद अभी खाली पड़े हैं, जिससे विस्तार अपरिहार्य लगता है। हालांकि आधिकारिक पुष्टि न होने से अटकलें बनी हुई हैं और योगी सरकार की चुप्पी रणनीतिक नजर आती है। यदि यह घोषणा हुई तो उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया समीकरण बन जाएगा।

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