बेंगलुरु के बाहरी इलाके चंदापुर में स्थित एक डेंटल कॉलेज में दंत चिकित्सा की छात्रा यशस्विनी (23) की आत्महत्या ने समाज में शोक और चिंता की लहर फैला दी है। पुलिस जांच में सामने आया है कि कॉलेज में उसके साथ कथित तौर पर रंग और पहनावे को लेकर अपमानजनक व्यवहार किया गया, जिसके चलते छात्रा ने यह दुखद कदम उठाया।
पुलिस ने बताया कि ओरल मेडिसिन एंड रेडियोलॉजी (ओएमआर) विभाग के छह लेक्चररों को कॉलेज प्रबंधन ने बर्खास्त कर दिया है। इन लेक्चररों पर यशस्विनी के साथ कथित भेदभाव और अपमानजनक व्यवहार का आरोप है।
परिजनों और सहपाठियों के आरोप
यशस्विनी के परिवार और सहपाठियों का आरोप है कि उसे कक्षा में सार्वजनिक रूप से ताने मारे गए। reportedly कहा गया कि, “काले रंग की लड़की डाक्टर कैसे बन सकती है?” इस तरह के ताने और अपमान ने छात्रा की मानसिक स्थिति पर गंभीर असर डाला।
केस संभालने से रोका गया
आंखों में दर्द के कारण छुट्टी लेने पर भी उसे सेमिनार प्रस्तुत करने और रेडियोलॉजी केस संभालने से रोका गया। इस दौरान कथित तौर पर अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षा संस्थानों में रंग, जाति और पहनावे के आधार पर भेदभाव छात्रों की मानसिक स्थिति पर गंभीर असर डाल सकता है। इस मामले की जांच अभी जारी है और पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है।
इस घटना ने न केवल शिक्षा जगत में, बल्कि पूरे समाज में शैक्षणिक संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य और समानता के महत्व पर बहस शुरू कर दी है।

