भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने पृथ्वी के वायुमंडल पर एक महत्वपूर्ण खुलासा किया है। इसरो के अनुसार, अंतरिक्ष में मौजूद धूल के कण लगभग हर 16 मिनट में पृथ्वी के वायुमंडल से टकराते हैं।
इसरो ने यह जानकारी देश में विकसित पहले कॉस्मिक डस्ट डिटेक्टर, द डस्ट एक्सपेरिमेंट (DEX), की मदद से प्राप्त की है। इस यंत्र ने अंतरिक्ष में फैली धूल की गतिविधियों और उनकी आवृत्ति का सटीक डेटा उपलब्ध कराया।
इसरो के वैज्ञानिकों के अनुसार, ग्रहों और कॉमेट्स के बीच में मौजूद धूल के छोटे कण अक्सर टूटकर अंतरिक्ष में बिखर जाते हैं। इन कणों में से कुछ पृथ्वी की ओर आते हैं और उन्हें हम आम भाषा में ‘टूटता तारा’ के रूप में देख पाते हैं।
इस अध्ययन से न केवल अंतरिक्षीय धूल के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली है, बल्कि पृथ्वी पर अंतरिक्षीय कणों के प्रभाव और उनकी आवृत्ति के आंकड़े भी स्पष्ट हुए हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि आगे इस डेटा से मौसम विज्ञान, उपग्रह सुरक्षा और अंतरिक्षीय पर्यावरण अध्ययन में भी मदद मिलेगी।

