हिमाचल पंचायत चुनाव में देरी पड़ेगी भारी, केंद्रीय ग्रांट पर गहरा सकता है संकट, 31 जनवरी के बाद क्या होगा?
हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों के चुनाव 31 जनवरी तक करवाना निर्धारित नियमों के तहत आवश्यक है। वर्तमान स्थितियों में जनवरी में चुनाव संभव नहीं हैं और ऐसे में पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों के चुनाव अप्रैल या मई में हो सकते हैं।
ऐसे में पंचायती राज अधिनियम के अनुसार नई कार्यकारिणी के गठन न होने पर प्रशासक लगाने पड़ सकते हैं। ऐसे में चुनावों में की जा रही देरी गंभीर वित्तीय संकट का कारण बन सकती है।
गहरा सकता है ग्रांट पर संकट
यदि समय रहते पंचायती राज संस्थाओं की तीन स्तरीय प्रणाली और शहरी निकायों के चुनाव नहीं करवाए गए तो प्रदेश की पंचायतों को मिलने वाली केंद्रीय ग्रांट पर संकट गहरा सकता है। पंचायती राज अधिनियम के तहत ग्राम पंचायतों में चुने हुए जनप्रतिनिधियों का होना अनिवार्य है, ताकि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का क्रियान्वयन सुचारू रूप से हो सके।

