मवेशी तस्करों ने अब तस्करी का तरीका बदलते हुए एक नया रास्ता अपना लिया है। सीधे वाहन या संगठित गिरोह की बजाय अब भोले-भाले लोगों और किसानों को आगे कर एक राज्य से दूसरे राज्य में मवेशी भेजे जा रहे हैं।
शनिवार को एनएच-22 मुजफ्फरपुर–हाजीपुर मुख्य मार्ग से जुड़ी सड़कों पर दर्जनों की संख्या में मवेशियों को सड़क किनारे पैदल ले जाते हुए देखा गया। यह दृश्य तस्करी के बदले हुए पैटर्न की ओर इशारा करता है, जहां किसी तरह के वाहन या बड़े काफिले का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा।
सूत्रों के अनुसार, मवेशी तस्करी के लिए कटिहार, पूर्णिया, फारबिसगंज समेत पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों के किसानों से भैंसें खरीदी जा रही हैं। इन किसानों को इस बात का अंदाजा तक नहीं होता कि उनके पशु तस्करी के नेटवर्क का हिस्सा बन रहे हैं।
खरीदे गए मवेशियों को उत्तर प्रदेश के मऊ जिले ले जाया जाता है, जहां उन्हें तौल के हिसाब से बेचने की जानकारी सामने आई है। माना जा रहा है कि इस तरीके से तस्कर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी से बचने की कोशिश कर रहे हैं।

