चंडीगढ़ की होम-स्टे नीति के ड्राफ्ट में बड़ा बदलाव; फ्लैट्स वाले नहीं कर सकेंगे एक्स्ट्रा कमाई, जानें क्या रहेंगी शर्तें?

 यूटी प्रशासन ने प्रस्तावित होम-स्टे नीति के ड्राफ्ट में बड़ा बदलाव किया है, जिससे फ्लैट्स वालों की एक्स्ट्रा कमाई की उम्मीदों को झटका लगा है। दिल्ली में हाल ही में एक बेड एंड ब्रेकफास्ट (बीएंडबी) सुविधा में लगी आग के बाद सामने आए सुरक्षा सवालों के बीच ऐसा कदम उठाया गया है।

प्रशासन ने ड्राफ्ट नीति में कई महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए इसे इस्टेट ब्रांच के पास भेज दिया है। नए प्रविधानों के तहत अब केवल एक कनाल या उससे बड़े मकानों में ही बेड एंड ब्रेकफास्ट सुविधा संचालित करने की अनुमति दी जाएगी, जबकि फ्लैट्स को इस व्यवस्था से पूरी तरह बाहर रखा गया है।

अर्बन प्लानिंग विभाग ने नीति को मंजूरी देते हुए तीन प्रमुख शर्तें जोड़ी हैं। पहली, होम-स्टे की अनुमति सिर्फ एक कनाल या उससे बड़े आवासीय भवनों को मिलेगी। दूसरी, किसी भी आकार के फ्लैट में यह सुविधा शुरू नहीं की जा सकेगी। तीसरी, होम-स्टे संचालन के लिए मकान में किसी प्रकार का संरचनात्मक बदलाव करने की अनुमति नहीं होगी।

नीति के तहत पंजीकरण प्रक्रिया भी कड़ी की गई है। संयुक्त स्वामित्व वाली संपत्ति के मामले में सभी हिस्सेदारों की लिखित सहमति आवश्यक होगी। कमरों को गोल्ड और सिल्वर श्रेणी में बांटा जाएगा।

गोल्ड श्रेणी के लिए कमरे का क्षेत्रफल 180 वर्ग फुट या उससे अधिक तथा सिल्वर श्रेणी के लिए 120 से 180 वर्ग फुट निर्धारित किया गया है। एक मकान में अधिकतम आठ कमरों का ही उपयोग किया जा सकेगा। शहर की 100 रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन का नेतृत्व कर रही क्राफ्ड संगठन भी इस स्कीम का विरोध कर रही थी।

इसके अलावा फायर विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी), कार्यशील फायर फाइटिंग सिस्टम, परिसर में पर्याप्त पार्किंग, एफएसएसएआई से फूड लाइसेंस और इस्टेट कार्यालय का ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट अनिवार्य होगा। प्रशासन का मानना है कि इन प्रविधानों से सुरक्षा और नियमन दोनों सुनिश्चित हो सकेंगे।

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