‘हिंदू विकास दर’ कम उम्मीदों वाले कांग्रेस युग की विरासत थी, पीयूष गोयल बोले- भारत की क्षमता को कम करके आंका गया

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वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को उन लोगों पर निशाना साधा, जिन्होंने भारत की आर्थिक वृद्धि को केवल 4-4.5 प्रतिशत तक सीमित समझा।

उन्होंने विश्व हिंदू आर्थिक फोरम 2025 में कहा कि अतीत में भारत की धीमी आर्थिक वृद्धि को ‘हिंदू विकास दर’ कहा गया था। यह शब्द अर्थशास्त्री राज कृष्णा ने पिछली सदी के आठवें दशक के अंत में गढ़ा था। यह आजादी के बाद 1950 से 1980 के बीच तीन से चार प्रतिशत की औसत जीडीपी वृद्धि को दर्शाता था।

उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व की कांग्रेस और कांग्रेस-नेतृत्व वाली संप्रग सरकारों के दौरान यह धारणा बन गई थी कि सरकार चाहे जो हो, देश 4 से 4.5 प्रतिशत की दर से तेज नहीं बढ़ सकता।

उन्होंने कहा- ”भारत की क्षमता को कम करके आंका गया।” उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत अगले दो-तीन वर्षों में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लिए तैयार है।

उन्होंने पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के 2014 के अनुमान का खंडन करते हुए कहा कि यह परिवर्तन 30 वर्षों में भी नहीं होगा।गोयल ने कहा- ”2044 तक हम संभवत: 25-30 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनेंगे। हमारा विकसित भारत 2047 का सपना 30 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा की अर्थव्यवस्था बनना है।”

2004-2014 की संप्रग सरकार पर कटाक्ष करते हुए केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि उन्होंने भारत की आर्थिक और महंगाई की स्थिति को कमजोर किया।

गोयल ने कहा कि हमने उन्हें चार प्रतिशत महंगाई और आठ प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दी जबकि 2004 से 2014 के बीच यह उलटा था यानी चार प्रतिशत विकास दर और आठ प्रतिशत महंगाई।

उन्होंने कुछ बड़े घोटालों का उल्लेख करते हुए कहा कि संप्रग काल के दस वर्षों के कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार का स्तर अपने चरम पर था। उन्होंने भारत के हाल के व्यापार समझौतों को आत्मविश्वास और आत्म-सम्मान से भरा बताया।

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